दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी में अब आधिकारिक रूप से 13 राजस्व जिले अस्तित्व में आ गए हैं। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद दिल्ली सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब राजस्व जिलों और नगर निगम जोनों की सीमाएं एक जैसी होंगी, जिससे वर्षों पुरानी प्रशासनिक अड़चन खत्म हो गई है।
अब तक अलग-अलग विभागों की सीमाएं अलग होने के कारण सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, शिकायत निवारण और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में लगातार दिक्कतें सामने आ रही थीं। नई प्रणाली से इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद की जा रही है।
एक छत के नीचे होंगे सभी सरकारी काम
सरकार की योजना प्रत्येक जिले में मिनी सचिवालय स्थापित करने की है, जहां आम जनता के सभी सरकारी कार्य एक ही स्थान पर पूरे हो सकेंगे। इसके साथ ही जिलाधिकारियों (डीएम) के अधिकार भी बढ़ाए गए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इससे शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, तेज और जनहितकारी बनेगी। उन्होंने बताया कि जिलों की सीमाओं से जुड़ी दशकों पुरानी समस्या का समाधान सरकार ने महज 10 महीनों में किया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी
नई सरकार ने जून में 11 के बजाय 13 राजस्व जिले बनाने का ऐलान किया था। 11 दिसंबर को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी और अब अधिसूचना जारी कर दी गई है। सभी 13 जिलों में मिनी सचिवालय बनाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल चुकी है।
एसडीएम की संख्या बढ़ी, प्रशासन जनता के और करीब
नई व्यवस्था में एसडीएम की संख्या 33 से बढ़ाकर 39 कर दी गई है। वहीं एसडीएम कार्यालयों की संख्या भी 22 से बढ़कर 39 हो गई है, जिससे सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में ही कार्य करेंगे। इससे जनता की प्रशासन तक सीधी पहुंच आसान होगी।
नई दिल्ली और मध्य जिले में 2-2 एसडीएम, दक्षिण, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम जिलों में 4-4 एसडीएम तथा अन्य जिलों में 3-3 एसडीएम तैनात किए जाएंगे। निगम के 272 वार्डों को अलग-अलग एसडीएम क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से बांटा गया है।
25 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट मंजूर
इस बदलाव के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 25 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट भी स्वीकृत किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे भूमि रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण, नागरिक सेवाएं और शिकायत निवारण जैसी प्रक्रियाएं अधिक तेज और सुचारु होंगी।
जनता को क्या होगा फायदा?
नई जिला व्यवस्था से सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, प्रशासन नागरिकों के और करीब आएगा, शिकायतों का समाधान तेजी से होगा और अधिकारियों पर काम का दबाव कम होगा। साथ ही राजस्व विभाग, नगर निगम और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। शहरी योजना, आपदा प्रबंधन और भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी हो सकेगा।
कुल मिलाकर, दिल्ली में 13 जिलों की नई व्यवस्था को शासन सुधार की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।







