दिल्ली में वायु प्रदूषण का नया असर: कब्ज की समस्या बढ़ी, पेट और लिवर कैंसर का खतरा भी गंभीर

SHARE:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पेट से जुड़ी बीमारियों का बड़ा कारण बनता जा रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में कब्ज, गैस और पेट साफ न होने की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। चिंताजनक बात यह है कि इस समस्या से अब बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।

दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में रोजाना 100 से ज्यादा मरीज कब्ज से जुड़ी परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या 25 से भी कम थी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के चलते लोग सुबह-शाम की सैर, व्यायाम और बच्चे खुले में खेलना कम कर रहे हैं। लंबे समय तक घर के अंदर निष्क्रिय रहना, कम पानी पीना और सर्दियों में प्यास कम लगना आंतों की कार्यप्रणाली को धीमा कर देता है, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ जाती है।

शोध में भी पुष्टि
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल टॉक्सिक्स (MDPI) में प्रकाशित शोध के अनुसार, वायु प्रदूषण के लंबे संपर्क से गट माइक्रोबायोटा प्रभावित होती है। इससे पाचन तंत्र बिगड़ता है और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी
मैरिंगो एशिया अस्पताल के निदेशक व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बीर सिंह सहरावत के अनुसार, प्रदूषित हवा में सांस लेने से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम और इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से गैस्ट्रिक कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी बढ़ सकती है।

वहीं, सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पियूष रंजन बताते हैं कि कब्ज का मतलब सिर्फ शौच न होना नहीं, बल्कि शौच के बाद भी पेट का पूरी तरह साफ न होना है। मल के लंबे समय तक आंतों में रहने से गैस, एसिडिटी, पेट में भारीपन और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। लंबे समय तक कब्ज रहने पर बवासीर, एनल फिशर, आंतों में रुकावट और रेक्टल प्रोलैप्स जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं।

डॉक्टरों ने चेताया है कि 50 वर्ष की उम्र के बाद अचानक कब्ज शुरू होना, वजन कम होना या मल के साथ खून आना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत जांच और इलाज जरूरी है।

कब्ज के प्रमुख कारण

  • बढ़ता वायु प्रदूषण और निष्क्रिय जीवनशैली
  • कम पानी पीना
  • फाइबर की कमी वाला भोजन
  • तनाव और नींद की कमी
  • थायराइड या आंतों से जुड़ी बीमारियां

सामान्य लक्षण

  • पेट का पूरी तरह साफ न होना
  • शौच में जोर लगाना
  • गैस और पेट में भारीपन
  • सिरदर्द और बेचैनी
  • सख्त मल

घरेलू उपाय

  • सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं
  • आहार में सलाद, हरी सब्जियां और फल शामिल करें
  • फाइबर युक्त आहार या इसबघोल का सेवन करें
  • नियमित समय पर शौच की आदत डालें
  • घर के अंदर हल्का व्यायाम या योग करें
  • पर्याप्त नींद लें
Kinni Times
Author: Kinni Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *