झारखंड हाई कोर्ट द्वारा आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता महेश तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। हाई कोर्ट ने उन पर सुनवाई के दौरान जज पर आवाज़ ऊंची करने और अनुशासनहीन व्यवहार का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई तय की है। इसके चलते झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि अब अगली कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही की जाएगी।
हाई कोर्ट की पांच जजों की वृहद पीठ—चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस आर. मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर—ने महेश तिवारी से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।
पूरा मामला उस समय गरमाया था जब हाई कोर्ट में एकलपीठ की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान महेश तिवारी और जस्टिस राजेश कुमार के बीच तीखी नोकझोंक का वीडियो वायरल हुआ। कोर्ट ने इसे “न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य” मानते हुए आपराधिक अवमानना का मामला आगे बढ़ाया था।
अधिवक्ता तिवारी ने अदालत में कहा था कि उन्होंने जो भी कहा “पूरी होश में कहा” और उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है। हाई कोर्ट का मानना है कि किसी जज पर उंगली उठाना और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना अवमानना की श्रेणी में आता है।
अब पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसके फैसले का इंतज़ार किया जा रहा है।








