बीएमसी चुनावों के नतीजे आने के बाद मुंबई को नया मेयर कब मिलेगा, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। इसी बीच उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत के एक बयान ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज कर दी है। राउत ने संकेत दिए हैं कि अगर परिस्थितियां बनीं तो बीजेपी को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है।
संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी का मेयर चाहते हैं, लेकिन बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे गुट के जीते हुए कॉर्पोरेटरों को एक होटल में लगभग कैदियों की तरह रखा गया है। राउत ने सवाल उठाया कि केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद कॉर्पोरेटर इतने डरे हुए क्यों हैं।
बहुमत का गणित और सियासी पेच
बीजेपी के पास बीएमसी में 89 सीटें हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 114 का है। ऐसे में उसे मेयर बनाने के लिए एकनाथ शिंदे गुट के समर्थन की जरूरत होगी। शिंदे ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इसी बीच उद्धव ठाकरे गुट की ओर से अप्रत्यक्ष समर्थन की अटकलों ने नया सियासी मोड़ दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि बीजेपी का मेयर बनता है तो उद्धव गुट वोटिंग से दूरी बना सकता है। इसे अप्रत्यक्ष समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। इन अटकलों को तब और हवा मिली जब संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दावोस यात्रा की तारीफ की थी और इसे मराठी मानुष के लिए गर्व की बात बताया था।
बीजेपी का रुख
बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे किसी भी हालत में उद्धव ठाकरे गुट का साथ नहीं लेंगे। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मेयर चुनाव में कुछ देरी हो सकती है और फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उद्धव ठाकरे गुट का यह कदम असल में एकनाथ शिंदे को असहज करने की रणनीति हो सकता है, क्योंकि मौजूदा सियासी लड़ाई में उनका असली टकराव शिंदे से ज्यादा है, न कि बीजेपी से।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मेयर चुनाव में आखिर किसका पलड़ा भारी पड़ता है और मुंबई को नया मेयर कब मिलता है।








