असली शिवसेना और एनसीपी पर 2026 में होगा फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने तय की अंतिम सुनवाई की तारीख

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महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े दो अहम सवाल—कौन है असली शिवसेना और कौन है असली एनसीपी—का जवाब अब अगले साल मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पार्टियों के चुनाव चिन्ह विवाद की अंतिम सुनवाई 21 जनवरी 2026 के लिए तय कर दी है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की दो सदस्यीय पीठ ने बुधवार (12 नवंबर 2025) को शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों मामलों में समान कानूनी मुद्दे हैं, इसलिए इन्हें एक साथ सुना जाएगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो सुनवाई 22 जनवरी को भी जारी रहेगी।

शिवसेना (यूबीटी) ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 2023 में एकनाथ शिंदे गुट को ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम ‘शिवसेना’ देने का आदेश दिया गया था। उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के असली बहुमत का आकलन गलत तरीके से किया और विधायकों की संख्या को ही आधार बना लिया।

वहीं, एनसीपी (शरद पवार) की याचिका भी इसी तरह के विवाद से जुड़ी है। शरद पवार गुट ने 2024 में आयोग द्वारा अजित पवार को ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह दिए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने फिलहाल शरद पवार गुट को ‘तुरही लिए आदमी’ का प्रतीक चिन्ह इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, जबकि अजित पवार गुट को प्रचार में यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि उनका मामला कोर्ट में लंबित है।

इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और देवदत्त कामत ने पक्ष रखा, जबकि एकनाथ शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और एन.के. कौल पेश हुए।

अब 21 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि महाराष्ट्र की इन दोनों बड़ी पार्टियों—शिवसेना और एनसीपी—की असली राजनीतिक और वैधानिक पहचान किस गुट के पास है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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