नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पीक आवर के जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने पैरलल रिंग रोड विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। प्रस्तावित सड़क मौजूदा इनर रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के समानांतर विकसित की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य दिल्ली में ऐसी सड़क व्यवस्था तैयार करना है, जिससे प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम हो और लोगों को शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच बिना रुकावट बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
55 किलोमीटर का एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर
इस योजना के तहत लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 55 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर ली है। प्रस्तावित कॉरिडोर को 6 चरणों में विकसित किए जाने की योजना है।
पहले चरण में मुकरबा चौक से आश्रम तक के हिस्से को शामिल किया गया है। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की योजना है।
प्रस्तावित प्रमुख खंडों में:
- आजादपुर फ्लाईओवर से ISBT हनुमान मंदिर — 9.5 किमी
- चांदगी राम अखाड़ा से मजनू का टीला — 2.5 किमी
- ISBT से DND फ्लाईओवर — 11.5 किमी
जैसे कॉरिडोर शामिल हैं।
10 बड़े चोक पॉइंट्स की हुई पहचान
ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए PWD ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर शहर के 10 बड़े चोक पॉइंट्स की पहचान की है। इनमें रिंग रोड के अलावा मथुरा रोड, अरबिंदो मार्ग, महरौली-महिपालपुर रोड और रानी झांसी रोड जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं।
PWD का मानना है कि दिल्ली के मौजूदा ट्रैफिक दबाव को केवल नए फ्लाईओवर बनाकर पूरी तरह कम नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक व्यापक सड़क नेटवर्क और वैकल्पिक कॉरिडोर की आवश्यकता है।
पीक आवर में रिंग रोड पर भारी ट्रैफिक
विभाग के अनुसार, पीक आवर के दौरान रिंग रोड पर 2.5 लाख से अधिक वाहन होने से कई हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में नई समानांतर रिंग रोड को मौजूदा मार्गों का वैकल्पिक विकल्प बनाकर वाहनों के दबाव को अलग-अलग कॉरिडोर में बांटने की योजना है।
सरकार के मुताबिक, नई सड़क परियोजनाओं में जलवायु-अनुकूल तकनीक और आधुनिक तकनीकी समाधानों को भी शामिल किया जाएगा। इससे राजधानी में कनेक्टिविटी के साथ-साथ भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
🚦 क्या बदलेगा?
पैरलल रिंग रोड परियोजना का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम करना, प्रमुख जंक्शनों पर जाम घटाना और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। फिलहाल परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन और आगे की तकनीकी प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।







