उपराष्ट्रपति धनखड़ ने बताए अपने रिटायरमेंट प्लान

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भारतीय राजनीति में नेताओं के रिटायरमेंट को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन हाल ही में देश के दो वरिष्ठ नेताओं — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ — ने अपने-अपने रिटायरमेंट को लेकर साफ़-साफ़ बातें की हैं। इन बयानों से न सिर्फ़ उनके भावी जीवन की योजना का पता चलता है, बल्कि यह भी झलकता है कि राजनीति के बाद वे किस दिशा में जाना चाहते हैं।


उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़: अगस्त 2027 में होंगे सेवानिवृत्त

गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक कार्यक्रम के दौरान भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पहली बार अपने रिटायरमेंट पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा:

“ईश्वर की कृपा रही तो मैं सही समय पर, अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त हो जाऊंगा।”

धनखड़ का उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होगा। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं और पेशे से एक अनुभवी वकील हैं। उनकी यह टिप्पणी एक हल्के-फुल्के अंदाज़ में आई, लेकिन इसने उनके भविष्य की योजना को लेकर स्पष्टता प्रदान की।


अमित शाह: वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती की तरफ़ रुख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अपने रिटायरमेंट प्लान का खुलासा करते हुए बताया कि राजनीति से हटने के बाद वे एक शांत और आत्मिक जीवन जीने की योजना बना चुके हैं। उन्होंने कहा:

“जब भी राजनीति से रिटायर होऊंगा, वेद और उपनिषद का अध्ययन करूंगा। मुझे खेती करना भी बहुत पसंद है, इसलिए मैं प्राकृतिक खेती करूंगा।”

शाह ने यह भी बताया कि उन्हें वेद और उपनिषद पढ़ने का विशेष लगाव है, लेकिन व्यस्त राजनीतिक जीवन के चलते वह इसे समय नहीं दे पा रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद वे इस ज्ञान को आत्मसात करना चाहते हैं।


प्राकृतिक खेती: विज्ञान और परंपरा का संगम

अमित शाह ने प्राकृतिक खेती को “एक वैज्ञानिक प्रयोग” बताया जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों के लिए लाभदायक भी साबित हो सकता है। उन्होंने इस विषय में रुचि दिखाते हुए कहा कि वे रिटायरमेंट के बाद इस दिशा में कार्य करना चाहेंगे।


राजनीति के बाद जीवन: एक नई शुरुआत

धनखड़ और शाह — दोनों नेताओं की भावी योजनाएं यह दर्शाती हैं कि राजनीति के बाद भी एक सार्थक और शांतिपूर्ण जीवन की तलाश हो सकती है। एक ओर जहां उपराष्ट्रपति धनखड़ अपना कार्यकाल सम्मानजनक रूप से पूरा करना चाहते हैं, वहीं अमित शाह वैदिक साहित्य और कृषि को अपनी नई पहचान बनाना चाहते हैं।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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