नई दिल्ली, छतरपुर – हाल ही में छतरपुर विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक उठा-पटक के बीच डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) की कार्रवाई ने स्थानीय निवासियों को गहरी परेशानी में डाल दिया है। खासकर पोर्स कॉलोनी, जो DLF फार्म हाउस के पास PALM DRIVE क्षेत्र में 3-4 एकड़ में बसी हुई है, वहां रात के अंधेरे में बुलडोजर चलाकर घरों को तोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और राजनीतिक बदले की भावना से जोड़ रहे हैं।
इलाके में यह चर्चा तेज हो गई कि यह सब राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा है। निवासियों का आरोप है कि डीडीए के अधिकारी नेताओं के इशारे पर काम कर रहे हैं, और चुनावों के बाद सत्ता में आए पक्ष ने विपक्षी समर्थकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
रात में चलाया गया बुलडोज़र
रात के अंधेरे में किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आमतौर पर विवादास्पद मानी जाती है। पोर्स कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि रात करीब 8 बजे से डीडीए की टीम बुलडोज़र लेकर आई और बिना कोई पूर्व सूचना दिए मकानों को गिराना शुरू कर दिया।
यह न सिर्फ अवैध है बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है, क्योंकि लोगों को अपने घर खाली करने का मौका तक नहीं दिया गया।
10 साल से बसी कॉलोनी, अब क्यों आई डीडीए को याद?
पोर्स कॉलोनी पिछले 10 वर्षों से बसी हुई है। लोगों ने यहाँ अपने जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर घर बनवाए थे। सवाल यह उठता है कि जब ये कॉलोनी विकसित हो रही थी तब डीडीए कहां था?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनी की प्लॉटिंग और निर्माण कार्यों के दौरान डीडीए के भ्रष्ट अधिकारी रिश्वत लेकर आंखें मूंदे रहे। अब जब राजनीतिक समीकरण बदले हैं, तो वे कार्रवाई करने निकल पड़े हैं।
राजनीति की बलि चढ़ रहे कॉलोनी के निवासी
कॉलोनी के निवासी खुद को क्षेत्रीय नेताओं की आपसी खींचतान का शिकार मानते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक झगड़े और प्रशासनिक मिलीभगत का खामियाज़ा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। निवासियों का कहना है कि “अगर यह ज़मीन अवैध थी तो हमें प्लॉट क्यों बेचे गए? और अगर वैध थी, तो अब हमारे घर क्यों तोड़े जा रहे हैं?”
दिन में प्लॉटिंग, रात में तोड़फोड़: दोहरा रवैया क्यों?
स्थानीय लोगों ने डीडीए पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। दिन में जमीन की प्लॉटिंग होती रही, रजिस्ट्री और बिजली-पानी के कनेक्शन भी दिए गए। वहीं अब रात में कार्रवाई कर लोगों को उजाड़ा जा रहा है।यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही दर्शाता है बल्कि सरकारी मशीनरी की गैर-जिम्मेदाराना मानसिकता को भी उजागर करता है।
क्या है समाधान?
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और डीडीए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। यदि जमीन पर अवैध कब्जा हुआ था, तो समय पर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई? डीडीए ने अपना बोर्ड जमीन पर क्यों नहीं लगाया और यदि वैध कब्जा था, तो निवासियों को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
छतरपुर की पोर्स कॉलोनी में हुई डीडीए की बुलडोजर कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति और प्रशासन की मिलीभगत का खामियाज़ा आम जनता को भुगतना पड़ता है। रात में शुरू की गई यह कार्रवाई न सिर्फ अमानवीय थी बल्कि इसके पीछे की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जनता अब न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रही है।
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