नई दिल्ली। दिल्ली का मास्टर प्लान 2047 अधिसूचित होने के बाद भी इसे अंतिम और अपरिवर्तनीय दस्तावेज नहीं माना जा रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अध्यक्ष और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने संकेत दिया है कि जरूरत और बदलती परिस्थितियों के अनुसार मास्टर प्लान में सुधार और बदलाव किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी दस्तावेज पूरी तरह अंतिम नहीं होता। यदि भविष्य में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आते हैं तो उनमें सुधार की गुंजाइश बनी रहती है। एलजी ने मास्टर प्लान को केवल कागज तक सीमित रखने के बजाय उसके प्रावधानों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
20 अगस्त को अधिसूचित हुआ मास्टर प्लान
केंद्र सरकार ने मास्टर प्लान 2047 को 20 अगस्त को अधिसूचित किया था। इसके बाद एलजी ने DDA के उपाध्यक्ष एन. सरवन कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ योजना के क्रियान्वयन को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
एलजी के अनुसार, मास्टर प्लान तैयार करने के दौरान गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और DDA स्तर पर कई दौर में विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, योजना को बेहतर बनाने के लिए सुझाव और परामर्श की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
दिल्ली को वैश्विक शहर बनाने पर जोर
मंगलवार को MCD अधिकारियों, IIT विशेषज्ञों और इंदौर के मेयर के साथ भी मास्टर प्लान को बेहतर तरीके से लागू करने और दिल्ली के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
एलजी ने कहा कि मास्टर प्लान 2047 का प्रमुख उद्देश्य दिल्ली को भविष्य के लिए तैयार करना और एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक शहर के रूप में विकसित करना है। इसके लिए देश और दुनिया के सफल शहरों से सीख लेने पर जोर दिया जा रहा है।
वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में इंदौर और अफ्रीकी देश रवांडा के प्रयासों को भी दिल्ली के लिए उपयोगी उदाहरण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन अनुभवों के आधार पर दिल्ली में विकास, पर्यावरण और शहरी प्रबंधन से जुड़े कदमों को और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।








