जंतर-मंतर पर पाबंदी और CJP प्रवक्ताओं की हिरासत पर ओवैसी के तीखे सवाल, यूपी में बीजेपी के खिलाफ दिया गठबंधन का प्रस्ताव

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राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रवक्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने और दिल्ली के प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर पाबंदी लगाए जाने को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को रोकने के लिए विपक्षी दलों को नए राजनीतिक समीकरण और गठबंधन का खुला प्रस्ताव दिया है।

CJP प्रवक्ताओं की न्यायिक हिरासत पर उठाए सवाल

असदुद्दीन ओवैसी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रवक्ताओं—सौरव दास और आशुतोष रांका—को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कानूनी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।

जमानत और नोटिस का तर्क: ओवैसी ने कहा कि जब तक प्रदर्शन में हिंसा का कोई मामला न हो, तब तक पुलिस और प्रशासन को संबंधित व्यक्तियों को केवल नोटिस जारी करना चाहिए था या जमानत का विकल्प दिया जाना चाहिए था।

कार्रवाई में अंतर पर सवाल: उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसी मामले में एक व्यक्ति को रिहा कर दिया गया, तो बाकी दो लोगों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने की जरूरत क्यों पड़ी। ओवैसी के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है।

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने पर केंद्र की आलोचना

दिल्ली में ऐतिहासिक और प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर को तय स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले पर भी ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

ओवैसी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों को रोकने पर क्यों आमादा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में आम जनता और राजनीतिक दलों को अपनी माँगें उठाने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद पर असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि उनकी पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की है।

रजिस्ट्रेशन फॉर्म में बदलाव: AIMIM ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता पंजीकरण फॉर्मों में किए गए हालिया बदलावों पर आपत्ति जताई है।

पारदर्शिता की मांग: ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है, इसलिए यह देश के सामने स्पष्ट होना चाहिए कि आयोग द्वारा लिए गए निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे या किसी सदस्य ने उन पर असहमति व्यक्त की थी। पार्टी ने अदालत से आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की है।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन की पेशकश

गंभीर कानूनी मुद्दों के अलावा ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है।

विपक्षी दलों को प्रस्ताव: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए ओवैसी ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को दोबारा सत्ता में आने से रोकना है, तो सभी गैर-बीजेपी दलों को एक साथ आना होगा।

गठबंधन की बातचीत: उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में बीजेपी विरोधी मोर्चा बनाने के लिए वार्ता करने को पूरी तरह तैयार है। हालांकि, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य के अन्य प्रमुख विपक्षी दल इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं।

AIMIM प्रमुख ने एक ओर जहाँ नागरिक अधिकारों, जंतर-मंतर पर पाबंदी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, वहीं उत्तर प्रदेश के संदर्भ में अपनी भविष्य की राजनीतिक रणनीति के संकेत भी साफ कर दिए हैं।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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