राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर बड़े हमले और गड़बड़ी फैलाने की एक खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस साजिश का भंडाफोड़ पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े संदिग्ध आतंकी मोहम्मद हमीम मंडल को गिरफ्तार किए जाने के बाद हुआ है। जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी हमीम मंडल किसी भी तरह पुलिस की वर्दी हासिल कर भीड़ में घुलने-मिलने और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में अफरा-तफरी और हिंसा फैलाने की फिराक में था।
पूर्वी बर्दवान जिले से पकड़े गए हमीम मंडल से जब एसटीएफ की टीम ने कड़ाई से पूछताछ की, तो इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। आरोपी न केवल जंतर-मंतर पर तोड़फोड़ की योजना बना रहा था, बल्कि वह सीमा पार बैठे अपने आकाओं और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के सीधे संपर्क में भी था। जांच में यह भी सामने आया है कि कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाने की योजना पर काम किया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी को ऐसे वीआईपी और नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने का जिम्मा सौंपा गया था, जहां उनकी सुरक्षा व्यवस्था कम होती है।
मामले की जांच आगे बढ़ने पर एसटीएफ ने हनीट्रैप और जबरन वसूली के एक बड़े एंगल का भी खुलासा किया है, जिसके तहत झारखंड से हमीम मंडल की सहयोगी अर्पिता सरकार को भी गिरफ्तार किया गया है। इन पर कुछ प्रभावशाली नेताओं के बेटों को हनीट्रैप में फंसाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने और ब्लैकमेल करने की साजिश रचने का भी आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के पास से मैक्सिको और यूनाइटेड किंगडम के अंतरराष्ट्रीय सिम कार्ड, कई डिजिटल उपकरण और एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के चैट रिकॉर्ड्स बरामद किए हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स, देश भर में फैले संभावित स्लीपर सेल्स और इस आतंकी साजिश में शामिल अन्य नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी हुई हैं।







