अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय IT कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कुछ नए H-1B मामलों पर लागू 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त भुगतान शर्त को अगले एक साल के लिए बढ़ा दिया है। यह व्यवस्था अब 21 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी।
किन लोगों पर लागू होगी नई व्यवस्था?
व्हाइट हाउस के मुताबिक यह भुगतान शर्त मुख्य रूप से उन नए H-1B कर्मचारियों पर लागू है जो अमेरिका से बाहर हैं और जिनके लिए नई H-1B याचिका दाखिल की जा रही है। ऐसे मामलों में संबंधित नियोक्ता को 1 लाख डॉलर का भुगतान करना होगा, हालांकि राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में सरकार छूट दे सकती है।
वहीं, अमेरिका में पहले से मौजूद H-1B कर्मचारियों और कुछ ऐसे विदेशी छात्रों के मामलों पर यह नियम उसी तरह लागू नहीं होता। इसलिए हर H-1B आवेदक पर इस अतिरिक्त भुगतान का असर एक जैसा नहीं होगा।
सरकार ने क्यों बढ़ाई यह शर्त?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल कुछ कंपनियां कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने के लिए कर रही थीं। खास तौर पर IT स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियों को लेकर प्रशासन ने चिंता जताई है।
सरकार के अनुसार, 2025 में लागू की गई 1 लाख डॉलर की भुगतान व्यवस्था का उद्देश्य कम वेतन और कम कौशल वाली भर्तियों को हतोत्साहित करना तथा ज्यादा विशेषज्ञता वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देना है।
भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या असर पड़ेगा?
भारत H-1B कार्यक्रम का एक प्रमुख लाभार्थी देश रहा है और बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिका में टेक्नोलॉजी और दूसरे विशेष कौशल वाले क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में अमेरिका के बाहर से नए कर्मचारियों को H-1B के जरिए भेजने वाली कंपनियों के लिए लागत काफी बढ़ सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर भारतीय H-1B कर्मचारी को 1 लाख डॉलर का भुगतान करना होगा। नियम खास परिस्थितियों में नए H-1B मामलों और अमेरिका के बाहर मौजूद कर्मचारियों पर केंद्रित है।
H-1B आवेदनों की जांच भी होगी सख्त
1 लाख डॉलर की शर्त बढ़ाने के साथ अमेरिकी प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम की निगरानी मजबूत करने के लिए एक अलग आदेश भी जारी किया है। इसमें संबंधित एजेंसियों को यह देखने का निर्देश दिया गया है कि H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले नियोक्ताओं ने समान पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या ऐसी कोई योजना बनाई है।
इसका उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के इस्तेमाल और नियोक्ताओं की भर्ती प्रक्रिया की ज्यादा गहन समीक्षा करना है।
फैसले को लेकर कानूनी चुनौती भी जारी
H-1B पर 1 लाख डॉलर की भुगतान शर्त को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी चुनौती चल रही है। रॉयटर्स के अनुसार, इस शुल्क को लेकर एक संघीय अदालत में विवाद जारी है और अपील स्तर पर भी मामले की सुनवाई हो रही है।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने इस व्यवस्था को अगले 12 महीनों के लिए आगे बढ़ा दिया है। ऐसे में भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिका में भर्ती करने वाली कंपनियों के लिए H-1B प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा महंगी और जांच-आधारित हो सकती है।








