इजरायल चुनाव: नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी, लेकिन बहुमत से दूर; सरकार बनाने में अरब पार्टियों की होगी अहम भूमिका

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इजरायल के संसदीय चुनाव में सभी वोटों की गिनती पूरी हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ने संसद में सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा उसके पास नहीं है। ऐसे में अब इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक बातचीत का दौर शुरू हो गया है। इस बार सरकार बनाने में अरब राजनीतिक दलों की भूमिका अहम हो सकती है।

 

चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट के नेतृत्व में वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावना भी चर्चा में है। इसके लिए अरब पार्टियों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है।

 

सर्वे में क्या सामने आया?

 

‘द जेरूसलम पोस्ट’ के मुताबिक, विपक्ष की चार प्रमुख पार्टियों के समर्थकों के बीच किए गए सर्वे में 61 प्रतिशत लोगों ने गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाली संभावित गठबंधन सरकार में मंसूर अब्बास की ‘राआम’ पार्टी को शामिल करने का समर्थन किया।

 

वहीं, 20 प्रतिशत लोगों ने नए चुनाव कराने का समर्थन किया, जबकि 12 प्रतिशत ने नेतन्याहू के साथ रोटेशन सरकार बनाने के विकल्प को चुना। केवल 7 प्रतिशत लोग अति-रूढ़िवादी पार्टियों के साथ गठबंधन के पक्ष में नजर आए।

 

67 सीटों का बन सकता है समीकरण

 

संसद में विपक्षी दलों की 48 सीटों के साथ राआम की 8 और जॉइंट लिस्ट की 11 सीटें जोड़ने पर कुल 67 सीटें होती हैं। यह बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से अधिक है। हालांकि, इन दलों के बीच राजनीतिक सहमति बनना सरकार गठन की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

 

इजरायल में सरकार बनाने के चार संभावित रास्ते

 

1. नेतन्याहू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार

 

नेतन्याहू विपक्षी खेमे की दक्षिणपंथी पार्टियों को अपने साथ आने के लिए मना सकते हैं। ऐसा होने पर उनके नेतृत्व में नई गठबंधन सरकार बन सकती है।

 

2. आइसेनकोट के नेतृत्व में अरब पार्टियों का समर्थन

 

गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन राआम और जॉइंट लिस्ट का समर्थन हासिल कर 67 सीटों के साथ सरकार बनाने का प्रयास कर सकता है।

 

3. अल्पमत सरकार का विकल्प

 

एक अन्य संभावना यह है कि अरब पार्टियां सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन दें। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती विश्वास मत हासिल करने के लिए आइसेनकोट को अरब पार्टियों के कम से कम छह सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

 

4. राष्ट्रीय एकता सरकार या नए चुनाव

 

नेतन्याहू और आइसेनकोट के बीच समझौता होने पर राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प भी सामने आ सकता है। इसमें लिकुड, यशार, ब्याचाद और यिसरायल बेतेनु जैसी पार्टियां शामिल हो सकती हैं। इस गठबंधन के पास 66 सीटें होने का गणित बताया गया है।

 

अगर किसी भी पक्ष के बीच सहमति नहीं बनती है, तो इजरायल में दोबारा चुनाव कराने का रास्ता भी खुला रहेगा। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रह सकते हैं।

 

फिलहाल सभी की नजरें गठबंधन की बातचीत और राजनीतिक दलों के अगले फैसलों पर टिकी हैं।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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