सरकार की इस घोषणा का गलत तरीके से फायदा उठाने के लिए पृथला विधानसभा के गांव पन्हेड़ा कला में रखने वाले राजेंद्र देव ने साजिश रची। उसने 3 अगस्त को मुआवजे के 25 लाख रुपये हासिल करने के लिए अपने जिंदा पिता लालचंद को मृत घोषित कर गांव में शोक यात्रा निकाली।
महाकुंभ के दौरान भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई। सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की। सरकार की इस घोषणा का गलत तरीके से फायदा उठाने के लिए पृथला विधानसभा के गांव पन्हेड़ा कला में रखने वाले राजेंद्र देव ने साजिश रची। उसने 3 अगस्त को मुआवजे के 25 लाख रुपये हासिल करने के लिए अपने जिंदा पिता लालचंद को मृत घोषित कर गांव में शोक यात्रा निकाली। उसके पिता लालचंद अलीगढ़ में अपने किसी रिश्तेदार के यहां नौ महीने से रह रहे हैं।यह शोक यात्रा लालचंद के बेटे राजेंद्र देव ने 21 किलो आटे का दीप जलाकर निकाली। यात्रा ढोल नगाड़े के साथ निकाली गई। इससे पहले राजेंद्र देव की ओर से गांव में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए। साथ ही, सोशल मीडिया पर लोगों को यात्रा में शामिल होने के लिए गुजारिश की। राजेंद्र देव ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु हो चुकी है। उनकी याद में शोक यात्रा निकाली गई है। इस घटना के बारे में जब उनके पिता लालचंद को पता चला तो उन्होंने अलीगढ़ से ही सरपंच धर्मवीर के पास फोन कर यात्रा को रोकने के लिए कहा। धर्मवीर गांव के लोगों के साथ जब उसके घर पर पहुंचे तो यात्रा घर से निकल चुकी थी। चौराहे पर यात्रा को रोककर पिता लालचंद से उसकी बात करवाई गई।
25 लाख का था लालच
महाकुंभ के दौरान भगदड़ में कई भक्तों की जान चली गई थी। इस पर यूपी सरकार ने कहा था कि जिन साधु या भक्तों की जान गई है, उसके परिवार के लोगों को 25 लाख रुपये दिए जाएंगे। उस रकम को पाने के लिए राजेंद्र देव ने अपने जिंदा पिता को ही मृत घोषित कर दिया और गांव में शोक यात्रा निकाली। गांव के लोगों का आरोप है कि उसने गांव के लोगों के बीच में यह भी कहा है कि उसको पिता के नाम पर 25 लाख रुपये भी उनको मिल चुके हैं। लालचंद ने बताया कि वह अलीगढ़ से दो अगस्त की शाम को साइकिल से गांव पन्हेड़ा कला के लिए रवाना हुए थे। वह पांच अगस्त की दोपहर को गांव में पहुंचे।
प्रशासन से इंसाफ की मांग
बेटे राजेंद्र देव ने जबरदस्ती उनकी जमीन अपने नाम करवा ली, उसके बाद मारपीट कर नौ महीने पहले घर से निकाल दिया था। तब से वह अलीगढ़ में एक छोटी सी कुटिया में तीन अनजान लोगों के साथ रह रहे हैं। इस घटना की सूचना उनकी बहन ने उनको फोन पर दी। उनकी प्रशासन से मांग है कि बेटा बहू ने जो शोक यात्रा निकाली है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही मकान और जमीन वापस दिलाई जाए। मंगलवार को लालचंद को इंसाफ दिलाने के लिए पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत की ओर से उसके पूरे परिवार का गांव से बहिष्कार कर दिया गया है।




