मतदाता सूची से छूटे पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का विशेष अभियान, फॉर्म-6 को लेकर जारी हुए नए निर्देश

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मतदाता सूची से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। चुनाव आयोग ने उन सभी पात्र नागरिकों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान छूट गए थे। चुनाव आयोग की ओर से यह निर्देश 29 सितंबर को राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया था और 1 अक्टूबर को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इसे फिर से स्पष्ट किया गया। यह विशेष अभियान उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा जहाँ एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम इस दौरान सूची से छूट गया है, तो वह ‘फॉर्म-6’ (Form 6) के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है, साथ ही पहली बार वोट देने वाले नए नागरिक भी इसके माध्यम से नाम जुड़वा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 में जो अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी, वह अब सामान्य प्रक्रिया में लागू नहीं होगी और गैर-एसआईआर अवधि में ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म-6 का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

BLO की घर-घर जाकर मदद और राजनीतिक दलों का सहयोग

इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए चुनाव आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एसआईआर से पहले और बाद की मतदाता सूचियों का पूरी तरह मिलान किया जाए, ताकि उन पात्र मतदाताओं की पहचान की जा सके जिनके नाम प्रक्रिया के दौरान छूट गए हों। जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर लोगों को फॉर्म-6 भरने और जरूरी दस्तावेज जमा करने में पूरी मदद करेंगे। इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों और बूथ लेवल एजेंटों का सहयोग भी लिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर गोवा का मामला भी चर्चा में रहा, जहाँ 97 ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए थे जो अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए थे, जिसके बाद बीएलओ को फॉर्म-6 लेने के निर्देश दिए गए और आयोग के मुताबिक उनमें से 81 लोगों ने फॉर्म भर भी दिया।

विभिन्न राज्यों में हटाए गए नामों के आंकड़े और उनका सच

सामने आए आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के तहत विभिन्न राज्यों में भारी संख्या में नाम हटाए गए हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 2 करोड़ 5 लाख, महाराष्ट्र में करीब 2 करोड़ 7 लाख, पश्चिम बंगाल में करीब 83 लाख 86 हजार और तमिलनाडु में करीब 74 लाख नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा, राजधानी दिल्ली में करीब 51 लाख 50 हजार मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया है, जो कुल सूची में लगभग 33 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। हालांकि, इन आंकड़ों को समझते वक्त यह सावधानी रखना जरूरी है कि इन हटे हुए नामों में मृत, अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुके, अनुपस्थित या डुप्लीकेट मतदाता भी शामिल हैं, इसलिए हर हटाया गया नाम अपने आप में किसी पात्र नागरिक के मताधिकार के छिन जाने का प्रमाण नहीं है।

ECINet सिस्टम की समीक्षा और आयोग का मुख्य फोकस

इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम ‘ECINet’ को लेकर कुछ सवाल भी उठे हैं, जहाँ दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ प्रक्रियाओं और आईटी व्यवस्था को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद आयोग ने ईसीनेट (ECINet) की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने की बात भी कही है। बहरहाल, चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। अब पूरा फोकस केवल नाम हटाने की प्रक्रिया पर न होकर, छूटे हुए सभी पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में सम्मानजनक तरीके से जोड़ने पर है। यदि किसी नागरिक का नाम सूची में नहीं है, तो वह अपने क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर फॉर्म-6 के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कर सकता है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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