नई दिल्ली: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन जारी कर 23 अक्टूबर 2026 को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। यह मामला उनकी बेटी वीणा विजयन की कंपनी और निजी खनन कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) के बीच कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है।
इससे पहले 9 अक्टूबर को केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में पिनराई विजयन और उनकी बेटी के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए थे। अब ED की कार्रवाई के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है।
वीणा विजयन की कंपनी पर क्या हैं आरोप?
मामले के अनुसार, ED का आरोप है कि CMRL ने वर्ष 2018-2019 के दौरान वीणा विजयन की IT कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को करीब 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। आरोप है कि भुगतान के बदले कंपनी की ओर से कोई सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
छापेमारी में मिले कथित वित्तीय रिकॉर्ड
रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने 27 मई को वीणा विजयन और CMRL के प्रमोटर्स से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान वीणा के हाथ से लिखे कुछ रिकॉर्ड मिले, जिनमें कई लोगों के नाम, लेन-देन की रकम और दुबई भेजे गए पैसों का विवरण दर्ज था।
ED के अनुसार, दस्तावेजों में लगभग 20.05 करोड़ रुपये के लेन-देन का हिसाब मिला। इसके अलावा, करीब 3.49 लाख UAE दिरहम यानी लगभग 85 लाख रुपये दुबई भेजे जाने का ब्योरा भी सामने आया। एजेंसी ने इन दस्तावेजों को जब्त कर लिया था।
डिजिटल डिवाइस और हवाला लेन-देन की जांच
छापेमारी के दौरान ED ने कई डिजिटल उपकरण भी जब्त किए और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। जांच एजेंसी का कहना है कि वीणा के एक डिजिटल डिवाइस में कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी सिम कार्ड की तस्वीर मिली थी। ED को संदेह है कि इसका इस्तेमाल इंटरनेट कॉलिंग के लिए किया गया हो सकता है।
एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि जांच में हवाला के जरिए धन हस्तांतरण से संबंधित संकेत मिले हैं। ED के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों में दर्ज कुछ रकम वीणा विजयन की ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक है और यह CMRL से प्राप्त कथित भुगतान से अलग है।
23 अक्टूबर को पूछताछ पर नजर
अब पिनराई विजयन को 23 अक्टूबर को ED के सामने पेश होना है। जांच एजेंसी इस मामले में वित्तीय लेन-देन और उससे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
फिलहाल, मामले में ED की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है। आरोपों का उल्लेख अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।








