दिल्ली में प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर है। हवा की गुणवत्ता लगातार “बेहद ख़राब” श्रेणी में दर्ज की जा रही है। इसी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए थे कि किसी भी प्रकार का निर्माण-ध्वंस कार्य तुरंत रोका जाए और पॉल्युशन एक्ट का सख्ती से पालन कराया जाए। लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं।
छतरपुर-मैदानगढ़ी रोड पर खुलेआम अवैध निर्माण, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ
सर्वोच्च न्यायालय की चेतावनियों और पॉल्युशन एक्ट के लागू होने के बावजूद दिल्ली के छतरपुर के मैदानगढ़ी रोड पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण चल रहा है।
स्थानीय सूत्रों और ज़मीनी रिपोर्ट के अनुसार—
खसरा नंबर 633, 634 और 637
C.No-116 और C.No-117
गांव: छतरपुर, रीवाड़ी फार्म, मैदानगढ़ी रोड
इन इलाकों में एक दर्जन से अधिक इमारतों में खुलेआम बेसमेंट का निर्माण कराया जा रहा है। बेसमेंट खुदाई और कंक्रीट का काम पॉल्युशन एक्ट के तहत पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे हवा में धूल, PM-2.5 और PM-10 कणों का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन इन जगहों पर रात-दिन काम जारी है।
भू-माफियाओं का दबदबा, विभागों पर लाखों-करोड़ों की रिश्वत के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय भू-माफिया खुलेआम निर्माण करा रहे हैं और यह पूरा खेल भारी-भरकम रिश्वत के दम पर चल रहा है।
इन विभागों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं—
SDM साकेत
MCD दक्षिणी दिल्ली
पॉल्यूशन विभाग दक्षिणी दिल्ली
थाना मैदानगढ़ी पुलिस
आरोप है कि करोड़ों रुपये की रिश्वत लेकर अधिकारी अवैध निर्माण को न सिर्फ रोक नहीं रहे, बल्कि संरक्षण दे रहे हैं।
पड़ोसियों और राहगीरों के अनुसार, रात के समय बेसमेंट खोदने के लिए बड़ी मशीनें और कंक्रीट मिक्सर चलते दिखाई देते हैं। धूल का गुबार पूरे इलाके को ढक लेता है, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
प्रदूषण संकट और बढ़ेगा, अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की
दिल्ली NCR पहले से ही बेहद खराब वायु गुणवत्ता से जूझ रहा है। ऐसे में छतरपुर-मैदानगढ़ी जैसे क्षेत्रों में जारी अवैध निर्माण न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधी खिलवाड़ भी है।
यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो—
प्रदूषण और बढ़ेगा
स्थानीय निवासियों की सेहत पर गंभीर असर पड़ेगा
कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे







