दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बारीक प्रदूषक केवल सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा ही नहीं बढ़ाते, बल्कि दिमाग की सेहत पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं। मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिसका असर मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है।
फोर्टिस अस्पताल, ओखला के न्यूरोलॉजी सलाहकार डॉ. राघव कपूर के अनुसार, वायु प्रदूषण ब्लड वेसल्स की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है।
स्ट्रोक के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
स्ट्रोक की स्थिति तब पैदा होती है, जब दिमाग के किसी हिस्से तक खून की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है। ऐसी स्थिति में शरीर के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने और समझने में परेशानी, चेहरे का एक तरफ झुकना, अचानक नजर कमजोर होना और संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।
प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषण से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। AQI पर लगातार नजर रखें और प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
कुल मिलाकर, दिल्ली-NCR का प्रदूषण सिर्फ सांसों का दुश्मन नहीं है, बल्कि यह दिमाग और दिल की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।







