दिल्ली में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में इस साल 17 अक्टूबर तक डेंगू के कुल 901 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से लगभग एक-तिहाई मामले अकेले अक्टूबर महीने में दर्ज किए गए हैं। अक्टूबर में सामने आए मामलों की संख्या यह संकेत देती है कि मानसून के बाद भी राजधानी में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
डेंगू के मामलों में अक्टूबर के दौरान हुई बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। बारिश के बाद कई जगहों पर जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बन सकता है। ऐसे में घरों, छतों, कूलरों, गमलों और आसपास की खाली जगहों पर पानी जमा न होने देना बेहद जरूरी है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है, इसलिए केवल गंदगी से बचना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पानी जमा होने वाले सभी स्थानों की नियमित सफाई भी जरूरी है।
डेंगू से बचाव के लिए लोगों को मच्छरों से बचने के उपाय अपनाने चाहिए। घरों में मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले साधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, पूरी बाजू के कपड़े पहनना और आसपास पानी जमा न होने देना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण डेंगू से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने से बचना चाहिए। खासतौर पर डेंगू की आशंका होने पर एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।
दिल्ली में 17 अक्टूबर तक दर्ज किए गए 901 मामले इस बात पर जोर देते हैं कि डेंगू की रोकथाम के लिए लोगों और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है। अक्टूबर में सामने आए मामलों पर नजर रखते हुए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना और समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।








