दक्षिणी दिल्ली में अवैध बोरिंग परमिशन पर विवाद, जांच की मांग तेज

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नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली में कथित तौर पर अवैध बोरिंग परमिशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि साउथ रिवेन्यू से जुड़े कुछ अधिकारियों द्वारा नियमों के विपरीत बोरिंग की अनुमति जारी की गई। हालांकि इन आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।  स्थानीय सूत्रों और सामाजिक संगठनों ने मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है।

क्या हैं आरोप?

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि हाल ही में लगभग 25 नए बोरिंग परमिशन जारी किए गए, जबकि पिछले महीने भी करीब 50 अनुमतियों को लेकर सवाल उठे थे। आरोप यह भी है कि कुछ परमिशन कथित रूप से नियमों और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों के विपरीत दी गईं।

किन विभागों पर उठे सवाल?

मामले में साकेत तहसील और ग्राउंड वाटर विभाग के कुछ कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि फार्म हाउस मालिकों को नियमों के विरुद्ध अनुमति दी गई। यह भी कहा जा रहा है कि क्षेत्र में भूजल स्तर पहले ही चिंताजनक स्थिति में है, ऐसे में अतिरिक्त बोरिंग से पर्यावरणीय दबाव बढ़ सकता है।

NGT आदेशों की अनदेखी का दावा

स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह मामला National Green Tribunal (NGT) के दिशा-निर्देशों की संभावित अवहेलना से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी न्यायिक प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी प्रकार का उल्लंघन हुआ है, तो जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

जल संकट बनाम बोरिंग अनुमति

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सोनिया विहार और कुछ कॉलोनियों में पानी की आपूर्ति सीमित है आसपास की कॉलोनियों में लोगों को तीन दिन में एक बार पानी मिल रहा है और आम जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है और कई इलाकों में टैंकर पर निर्भरता बढ़ गई है। ऐसे में फार्म हाउस क्षेत्रों में फार्म हाउस मालिकों को स्विमिंग पूल, कोठी और पार्क के लिए बोरिंग की अनुमति दी जा रही है जिसके चलते पर्यावरण पर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है।

CBI जांच की मांग

सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आवश्यक हो तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या अन्य स्वतंत्र एजेंसियों से कराई जाए, ताकि तथ्यों की पारदर्शी समीक्षा हो सके। हालांकि, किसी भी जांच एजेंसी को मामला सौंपने का निर्णय संबंधित प्रशासनिक अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में आता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों या विभागों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण या जांच की घोषणा की जाती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

दक्षिणी दिल्ली में बोरिंग परमिशन को लेकर उठे सवालों ने जल प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल मामला आरोपों और दावों के स्तर पर है। सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और संभावित जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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