कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने शुक्रवार को और व्यापक रूप ले लिया। संगठन के आह्वान पर देशभर में जिला स्तर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और भी सख्त कर दी गई है।
जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग, टॉलस्टाय मार्ग और आसपास की कई प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को प्रतिबंधित कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में हुई हिंसक घटनाओं को देखते हुए सीआरपीएफ की 20 कंपनियां भी दिल्ली में तैनात की गई हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश पर अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए हैं, ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन स्थल के करीब दो किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। इसका असर केवल प्रदर्शनकारियों पर ही नहीं, बल्कि कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, बंगाली मार्केट, रायसीना रोड, बाराखंभा रोड और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों व कारोबारियों पर भी पड़ा है।
इंटरनेट बंद होने से फूड डिलीवरी और ऑनलाइन कैब सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। वहीं, सुरक्षा कारणों से कनॉट प्लेस के कई बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान तय समय से पहले बंद कर दिए गए। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ग्राहकों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में अब छात्रों के साथ-साथ हर आयु वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी प्रदर्शन स्थल पहुंच रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने भी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
इस बीच, CJP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से देशभर के छात्र संगठनों और युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि उनका आंदोलन छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जारी रहेगा।
राजधानी में बढ़ती भीड़ और प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








