पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, वांगचुक ने तोड़ा अनशन; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP

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पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री के इस ऐलान के कुछ ही समय बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 27 दिन का अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पहले पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद देर रात वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ एक कठोर कानून लाने जा रही है। इस विधेयक को शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा और मानसून सत्र के दौरान जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद सरकार ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कर करीब 22 लाख विद्यार्थियों को परीक्षा का अवसर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा से जुड़े मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसे मामलों पर तेज कार्रवाई हो सके और दोषियों को समय पर सजा मिले। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

इसी बीच, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने अपने अनशन के 27वें दिन स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में जूस पीकर अनशन समाप्त कर दिया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की घोषणाओं और सरकार की ओर से बातचीत की पहल के बाद यह फैसला लिया गया।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे केंद्रीय मंत्रियों और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच अहम बैठक प्रस्तावित है। सुरक्षा कारणों से बैठक का स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में आंदोलन खत्म कराने और छात्रों की मांगों पर चर्चा होगी।

हालांकि CJP ने प्रधानमंत्री की घोषणाओं को पर्याप्त नहीं माना है। पार्टी का कहना है कि केवल नए कानून या फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। CJP का आरोप है कि बार-बार पेपर लीक होने के पीछे जवाबदेही की कमी और व्यवस्था की खामियां जिम्मेदार हैं। पार्टी ने दोहराया कि उनकी पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

CJP ने शुक्रवार को देशभर में जिला स्तर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान भी किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार यदि बातचीत चाहती है तो उसे सीधे CJP नेतृत्व से संपर्क करना होगा और जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता करनी होगी।

उधर, केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में भी बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। विवादों में रहे उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें पंचायती राज मंत्रालय भेज दिया गया है। उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि टी.के. अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। चूंकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आती है, इसलिए इस बदलाव को भी सरकार की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब सबकी नजर शुक्रवार को होने वाली सरकार और CJP की बैठक पर टिकी है। यह बैठक तय करेगी कि आंदोलन शांत होगा या आने वाले दिनों में पेपर लीक का मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप लेगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times