सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही के दौरान हंगामा करने और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) समेत न्यायाधीशों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले एक याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं करने का फैसला लिया है। हालांकि, अदालत ने उसकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कानूनी दलीलें रखने के बजाय कोर्ट से एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की। जब अदालत ने इस पर आपत्ति जताई, तो उसने कोर्ट रूम में मौजूद दस्तावेज फेंक दिए और न्यायाधीशों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने लगा।
स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों ने उसे अदालत कक्ष से बाहर निकाल दिया। बताया गया कि बाहर ले जाते समय भी उसने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिससे कुछ देर के लिए अदालत का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता का व्यवहार अदालत की गरिमा के अनुरूप नहीं था और उसने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बजाय असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद अदालत ने उसकी परिस्थितियों को देखते हुए उसके खिलाफ अवमानना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया।
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए याचिका खारिज कर दी गई और हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा गया।
यह भी पढे
गुरुग्राम में पुलिस-शूटरों के बीच मुठभेड़ https://kinnitimes.com/?p=31136








