दिल्ली में 1,723 PG इमारतों के बिल्डिंग प्लान नहीं मिले, हाईकोर्ट ने MCD से पूछा- बाकी का क्या होगा?

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नई दिल्ली: दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों की सुरक्षा और वैधता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। नगर निगम (MCD) की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी में सर्वे की गई 2,453 PG इमारतों में से केवल 730 के स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध या सत्यापित हो सके हैं। बाकी 1,723 इमारतों के बिल्डिंग प्लान फिलहाल ट्रेस या सत्यापित नहीं हो पाए हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 1,723 PG इमारतें कानूनी रूप से अवैध घोषित हो चुकी हैं। MCD ने अदालत को बताया कि वह पुराने रिकॉर्ड और स्वीकृत नक्शों को ट्रेस करने की कोशिश कर रहा है। कुछ इमारतें 50-60 वर्ष पुरानी हैं और उनके रिकॉर्ड तलाशने में दिक्कत आ रही है।

हाईकोर्ट ने MCD से पूछा- बाकी इमारतों का क्या होगा?

सत्य निकेतन में PG भवन गिरने के बाद दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने MCD से सवाल किया कि जब 2,453 PG इमारतों में केवल 730 के बिल्डिंग प्लान उपलब्ध हैं, तो बाकी इमारतों के मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने यह भी पूछा कि जिन इमारतों के स्वीकृत प्लान उपलब्ध नहीं हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई कब होगी। साथ ही कोर्ट ने PG आवासों को नियंत्रित करने वाली मौजूदा व्यवस्था और उसके नियामकीय ढांचे पर भी सवाल उठाए।

2,453 PG में 32 हजार से ज्यादा कमरे

MCD के सर्वे के मुताबिक दिल्ली में चिन्हित 2,453 PG इमारतों में 32,247 कमरे हैं और इनमें लगभग 50,529 लोग रह रहे हैं। ऐसे में बिल्डिंग प्लान, निर्माण अनुमति और सुरक्षा मानकों से जुड़ी जानकारी का महत्व और बढ़ जाता है।

यह मामला खास तौर पर छात्रों और कामकाजी लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इन PG आवासों में रहते हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुई व्यापक जांच

यह मामला 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में PG भवन गिरने के बाद गंभीर हुआ। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली में PG आवासों की सुरक्षा, भवन अनुमति और नियमन से जुड़े पहलुओं की जांच का निर्देश दिया।

7 सितंबर के आदेश में हाईकोर्ट ने MCD को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG हॉस्टलों का निरीक्षण कर यह रिपोर्ट देने को कहा था कि संबंधित इमारतें जरूरी अनुमतियों के अनुसार बनी हैं या नहीं और कहीं भवन नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है।

सिर्फ नक्शा न मिलने से इमारत को अवैध नहीं माना जा सकता

इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी इमारत का स्वीकृत नक्शा रिकॉर्ड में न मिलना और उसका अवैध होना एक ही बात नहीं है।

MCD के अनुसार कई पुरानी इमारतों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए 1,723 इमारतों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए रिकॉर्ड की खोज, सत्यापन और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच जरूरी होगी।

इसी वजह से फिलहाल यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि इन इमारतों के बिल्डिंग प्लान ट्रेस या सत्यापित नहीं हुए हैं, न कि सभी 1,723 को अवैध घोषित कर दिया गया है।

MCD ने की सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई

हाईकोर्ट में MCD की ओर से दाखिल जानकारी के अनुसार, सत्य निकेतन हादसे के बाद अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में 543 संपत्तियां ध्वस्त की गईं और 178 को सील किया गया। इसके अलावा 354 शो-कॉज नोटिस जारी किए गए। MCD ने यह भी बताया कि संबंधित मामले में पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा कि ये कार्रवाई के आंकड़े विशेष रूप से PG इमारतों से संबंधित हैं या MCD की व्यापक कार्रवाई के आंकड़े हैं। MCD की ओर से बताया गया कि ये आंकड़े सामान्य प्रवर्तन कार्रवाई से संबंधित थे।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें MCD की आगे की जांच और हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। अदालत ने PG इमारतों की पहचान, उनके स्वीकृत नक्शों और नियामकीय व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को होने वाली है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 1,723 PG इमारतों के स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं हो पाए हैं, उनमें से कितनों के पुराने रिकॉर्ड बाद में मिलते हैं और कितनी इमारतों में वास्तव में भवन नियमों या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है।

मुख्य आंकड़े
2,453 — MCD के सर्वे में चिन्हित PG इमारतें
730 — जिनके बिल्डिंग प्लान उपलब्ध/सत्यापित हुए
1,723 — जिनके प्लान फिलहाल ट्रेस या सत्यापित नहीं हो पाए
32,247 — PG इमारतों में कुल कमरे
50,529 — अनुमानित निवासी
14 अक्टूबर 2026 — अगली हाईकोर्ट सुनवाई की तारीख

Kinni Times
Author: Kinni Times

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