आया नगर में अवैध निर्माण का आरोप: शिकायत में पुलिसकर्मियों व अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

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नई दिल्ली (महरौली): दक्षिण दिल्ली के आया नगर इलाके में ग्राम सभा/खेती की जमीन पर कथित अवैध कॉलोनी बसाए जाने को लेकर एक विस्तृत शिकायत विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक प्राधिकरणों को भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि लगभग 50 एकड़ भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये बताई जा रही है, पर छोटे-छोटे प्लॉट काटकर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जबकि इस पर न्यायालय का स्थगन आदेश (Stay Order) लागू होने का दावा किया गया है।

शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप

शिकायतकर्ता द्वारा भेजी गई याचिका में आरोप लगाया गया है कि आया नगर, तहसील महरौली स्थित खसरा नंबर 1809/2, 1561/2 व अन्य भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनी विकसित की जा रही है। यह निर्माण कार्य कथित रूप से न्यायालय के आदेशों और प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद जारी है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि स्थानीय स्तर पर बार-बार PCR कॉल करने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप

शिकायत में विशेष रूप से आरोप लगाया गया है कि:

हेड कांस्टेबल जितेंद्र पर खसरा नंबर 1809/2 पर निर्माण कार्य कराए जाने का आरोप लगाया गया है।

एडिशनल एसएचओ ऋषिकेश मीणा का नाम भी कथित रूप से इस पूरे प्रकरण में लिया गया है।

आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मी अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे हैं — हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

न्यायालय के स्टे ऑर्डर के उल्लंघन का दावा

शिकायत में कहा गया है कि:

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक सिविल रिट याचिका (वर्ष 2014 से संबंधित) में 22 मार्च 2017 को स्टे ऑर्डर पारित किया गया था।

एसडीएम महरौली द्वारा पूर्व में स्थानीय पुलिस को अवैध निर्माण रोकने के निर्देश दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

इसके बावजूद कथित रूप से निर्माण कार्य जारी रहने को शिकायतकर्ता ने अदालत की अवमानना (Contempt of Court) बताया है।

अलग-अलग एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल

शिकायत में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), नगर निगम (MCD), राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय की कमी का आरोप लगाया गया है।
दावा किया गया है कि:

विभिन्न मामलों में अलग-अलग एजेंसियों द्वारा भूमि की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाली जा रही है।

दर्ज FIR और वास्तविक कार्रवाई के आंकड़ों में कथित अंतर बताया गया है।

कुछ खसरों पर डिमोलिशन की बात रिकॉर्ड में है, जबकि मौके पर निर्माण जारी होने का आरोप लगाया गया है।

CBI जांच और डिमोलिशन की मांग

शिकायतकर्ता ने अपनी प्रार्थना में मांग की है कि:

पूरे प्रकरण की CBI से जांच कराई जाए।

संबंधित खसरों पर तत्काल डिमोलिशन और सीलिंग कार्रवाई की जाए।

कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई हो।

भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर न्यायालय में तथ्य प्रस्तुत किए जाएं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार

इस मामले में संबंधित विभागों — पुलिस, राजस्व प्रशासन, DDA और MCD — की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित जांच और सरकारी अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

दिल्ली के ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में भूमि उपयोग, ग्राम सभा जमीन और अनधिकृत कॉलोनियों का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। ऐसे मामलों में अक्सर राजस्व रिकॉर्ड, विकास एजेंसियों की अधिकार-सीमा और न्यायालयी आदेशों की व्याख्या को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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