त्योहारों के सीजन से पहले हवाई यात्रियों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। घरेलू उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में अक्टूबर महीने में 13.22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह लगातार तीसरा महीना है जब ATF की कीमत बढ़ी है। बढ़ी हुई ईंधन लागत का असर आने वाले समय में एयरलाइंस के परिचालन खर्च और हवाई किरायों पर पड़ सकता है।
121.28 रुपये से बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर हुआ ATF
अक्टूबर में ATF की कीमत करीब 16 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है। इससे पहले इसकी कीमत लगभग 121.28 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार हो रही बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर
ATF की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर भी घरेलू ईंधन लागत को प्रभावित करती है।
अप्रैल में सरकार ने लिया था कीमतों को सीमित करने का फैसला
इस साल अप्रैल में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने का फैसला किया था। एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर जैसी एयरलाइंस ने इस कदम का स्वागत किया था।
हालांकि, पिछले तीन महीनों से लगातार बढ़ रही ATF की कीमतों ने एयरलाइंस के खर्च को लेकर फिर चिंता बढ़ा दी है।
एयरलाइंस के खर्च में ईंधन की बड़ी हिस्सेदारी
किसी एयरलाइन को विमान संचालन के दौरान कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। इनमें पायलट और क्रू की सैलरी, विमान का लीज या किराया, रखरखाव, एयरपोर्ट शुल्क और अन्य परिचालन खर्च शामिल हैं।
इन सभी खर्चों में विमान ईंधन की हिस्सेदारी काफी बड़ी होती है। भारत में एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का करीब 35 से 40 फीसदी हिस्सा ATF पर खर्च होने का अनुमान है। ऐसे में ईंधन की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस की कुल लागत पर सीधा असर पड़ता है।
क्या हवाई किराए पर पड़ेगा असर?
ATF महंगा होने से एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ती है। हालांकि, इसका पूरा बोझ यात्रियों पर पड़ेगा या नहीं, यह एयरलाइन की लागत संरचना, किराया नीति, मांग और प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
त्योहारों के दौरान हवाई यात्रा की मांग आम तौर पर बढ़ती है। ऐसे में बढ़ी हुई ईंधन लागत एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण लागत दबाव बन सकती है।








