संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों के अधिकारों, मानवाधिकारों और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर घेरा है। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार की तुलना में सेना का प्रभाव अधिक है और वहां की चुनी हुई सरकार स्वतंत्र रूप से फैसले लेने की स्थिति में नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चर्चा के दौरान भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करता है, जबकि उसे अपने देश में मौजूद समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था की स्थिति, आर्थिक संकट और खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक मानवाधिकारों से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया।
भारत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां सेना का राजनीतिक नेतृत्व पर निर्णायक प्रभाव बना हुआ है। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह सेना के निर्देशों के खिलाफ फैसले लेने की स्थिति में नहीं है। यह टिप्पणी पाकिस्तान के 2024 के आम चुनावों के नतीजों को लेकर उठे विवादों के संदर्भ में की गई।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों के मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने देश की समस्याओं और नागरिकों के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए।
भारत ने यह भी कहा कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक देश की जिम्मेदारी है। भारतीय प्रतिनिधि ने भारत की बहुधार्मिक, बहुभाषी और बहुजातीय पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रावधान मौजूद हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस बयान से एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और जम्मू-कश्मीर को लेकर दोनों देशों के मतभेद सामने आए हैं। भारत ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड और सेना के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए उसे अपने नागरिकों के अधिकारों और देश की आंतरिक समस्याओं पर ध्यान देने की नसीहत दी।








