अमेरिकी वीजा नियमों पर मार्को रूबियो का बयान, बोले- भारत को निशाना बनाने का इरादा नहीं

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अमेरिका में वीजा नियमों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन के हालिया कदम भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाए गए हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। इसके साथ ही वीजा व्यवस्था में होने वाली धोखाधड़ी को रोकना और रोजगार के अवसरों में अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देना भी प्रशासन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

 

रूबियो के बयान के बीच अमेरिका में विदेशी पेशेवरों, भारतीय आईटी कर्मचारियों और वहां पढ़ाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े नियमों पर चर्चा तेज हो गई है। भारत और अमेरिका के बीच तकनीक, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में अमेरिकी वीजा नीतियों में होने वाले बदलावों का असर भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

आईटी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों पर बढ़ सकती है सख्ती

 

अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कई बड़ी आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। यह कार्यक्रम अमेरिका में कुछ विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिबंध या निलंबन से प्रभावित कंपनियों और विदेशी पेशेवरों को रोजगार आधारित आव्रजन प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर संबंधित कंपनियों पर लागू आदेशों और निलंबन की शर्तों पर निर्भर करेगा।

 

इसके अलावा, विदेशी छात्रों के ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम में नई फीस लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। OPT के तहत पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका में अपने अध्ययन क्षेत्र से संबंधित व्यावहारिक कार्य अनुभव हासिल कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में फीस से जुड़ा कोई बदलाव लागू होता है, तो भारतीय छात्रों सहित दूसरे देशों के विद्यार्थियों के खर्च पर असर पड़ सकता है। प्रस्ताव और लागू नियमों के बीच अंतर को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

 

भारत ने कुशल पेशेवरों की आवाजाही को बताया साझा हित

 

भारत का रुख रहा है कि कुशल पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही से भारत और अमेरिका, दोनों देशों को लाभ मिलता है। भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ अमेरिकी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भी वैश्विक प्रतिभाओं और विशेषज्ञता का फायदा मिलता है। शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का अहम हिस्सा है।

 

ऐसे में वीजा नियमों को अधिक सख्त बनाने, विदेशी कर्मचारियों की प्रक्रियाओं में बदलाव करने या अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाले कदमों को भारत-अमेरिका के साझा हितों के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं इन नीतियों से प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवाजाही और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग प्रभावित न हो।

 

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ सकता है असर?

 

मार्को रूबियो के बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन अपनी वीजा नीति को घरेलू रोजगार और नियमों के अनुपालन से जोड़कर देख रहा है। वहीं, भारत के लिए कुशल पेशेवरों की आवाजाही, छात्रों के अवसर और आईटी क्षेत्र में सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। आने वाले समय में वीजा नियमों से जुड़े प्रस्तावों और उनके कार्यान्वयन पर दोनों देशों की नजर रहेगी।

 

फिलहाल, इस मुद्दे का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन किन बदलावों को अंतिम रूप देता है और वे भारतीय कर्मचारियों, छात्रों तथा आईटी कंपनियों पर किस तरह लागू होते हैं।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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