टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, शूटरों को ऐसे मिलती थी फंडिंग और हथियार

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बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों आरोपियों को कथित तौर पर अनिल पंडित के निर्देश पर हथियार उपलब्ध कराए गए थे। आरोपियों की उससे बातचीत जंगी ऐप के जरिए होती थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

 

ऑनलाइन पेमेंट के जरिए पहुंचाए जाते थे पैसे

 

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों को मुंबई में रोजाना करीब 5 से 10 हजार रुपये ऑनलाइन भेजे जाते थे। बताया जा रहा है कि पैसे के लेन-देन को छिपाने के लिए वे स्थानीय दुकानदारों या अन्य लोगों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते थे। इसके जरिए मिलने वाली रकम से उनके रहने और दूसरे खर्च पूरे किए जाते थे।

 

मोबाइल और लोकेशन के जरिए पहुंचाए गए हथियार

 

जांच में हथियारों की सप्लाई को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हथियार इंदौर और मुंबई से आरोपियों तक पहुंचाए गए थे। इन्हें देने के लिए किसी व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने के बजाय मोबाइल पर लोकेशन और वीडियो भेजे जाते थे। इसके बाद हथियार कथित तौर पर कचरे के ढेर के पास रखे डिब्बों में पहुंचाए जाते थे।

 

पहचान छिपाने के लिए बरती जाती थी सावधानी

 

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आरोपी बातचीत के लिए ऐसे ऐप का इस्तेमाल करते थे, जिसमें मोबाइल नंबर से अकाउंट बनाना जरूरी नहीं बताया गया है। पकड़े जाने के डर से वे सिम कार्ड इस्तेमाल करने के बाद तोड़कर फेंक देते थे। पुलिस अब डिजिटल संपर्कों और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

 

एक अन्य आरोपी से भी पूछताछ

 

मामले में पुलिस ने सोनीपत निवासी रेहान के दोस्त समीर से भी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि समीर पहले अवैध हथियार के मामले में रेहान के साथ जेल में बंद था। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था और उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।

 

तीनों आरोपियों को मुंबई ले जाने की तैयारी

 

रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों आरोपी राजस्थान के कोटा स्थित रेलवे कॉलोनी पुलिस स्टेशन में रखे गए थे। मुंबई पुलिस उनसे कई दौर की पूछताछ कर चुकी थी। अब उन्हें सड़क मार्ग से मुंबई ले जाने की संभावना जताई गई थी, ताकि मामले में आगे की जांच की जा सके।

 

फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य फोकस कथित फंडिंग नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के संपर्कों का पता लगाना है। मामले में सामने आए आरोपों और दावों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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