फ्रांस में स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सितंबर 2026 के मध्य से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब देश के कई हिस्सों तक फैल चुका है। बड़ी संख्या में छात्र स्कूलों में शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, जर्जर इमारतों और पढ़ाई के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं। हालांकि, आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगहों पर टकराव हुआ है। हजारों लोगों की गिरफ्तारी और कई किशोरों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है।
शिक्षकों की कमी और जर्जर स्कूलों से नाराज हैं छात्र
छात्रों के इस आंदोलन की प्रमुख वजह स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा कई स्कूलों की इमारतें पुरानी और खराब हालत में हैं, जबकि कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। लंबे स्कूल शेड्यूल और विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था को लेकर भी असंतोष सामने आया है।
शिक्षा से जुड़े आंकड़े भी इन समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में 2024-25 के शैक्षणिक सत्र के दौरान लगभग 10 प्रतिशत निर्धारित शिक्षण घंटे नहीं हो पाए। इनमें बड़ी वजह शिक्षकों की अनुपस्थिति और उनकी जगह दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाना रही। ऐसे में छात्र सरकार से शिक्षा पर अधिक ध्यान देने और स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग कर रहे हैं।
6,700 से ज्यादा नाबालिग हिरासत में, पुलिस की कार्रवाई पर विवाद
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सख्ती अब इस पूरे आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गई है। द गार्जियन की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन शुरू होने के बाद से 6,773 नाबालिगों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में लिया गया। इनमें से एक हजार से अधिक मामलों में आरोप नहीं लगाए गए, जबकि अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई या वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाई गई







