Jio की कहानी: कॉलेज के इंटरनेट अनुभव से शुरू हुआ सफर, ईशा अंबानी ने बताया कैसे रिलायंस बनी कर्ज मुक्त कंपनी

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नई दिल्ली: रिलायंस जियो की शुरुआत के पीछे एक छोटी-सी परेशानी ने बड़ी भूमिका निभाई थी। कॉलेज के दिनों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या से जुड़े एक अनुभव ने भारत में डिजिटल सेवाओं को बेहतर बनाने की सोच को जन्म दिया। रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ी मीडिया मीट में ईशा अंबानी ने कंपनी की शुरुआत, रिलायंस की कारोबारी रणनीति और कर्ज मुक्त बनने तक के सफर से जुड़ी अहम बातें साझा कीं।

ईशा अंबानी के मुताबिक, जियो का विचार साल 2009-2010 के आसपास आया था। उस समय वह और उनके भाई आकाश अंबानी कॉलेज की छुट्टियों में मुंबई आए हुए थे। ईशा को अपना एक असाइनमेंट ऑनलाइन जमा करना था, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण वह ऐसा नहीं कर पाईं। इस अनुभव ने दोनों के बीच भारत में इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा शुरू कर दी।

ईशा ने बताया कि आकाश अंबानी का मानना था कि इस समस्या का समाधान एक ऐसे डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के जरिए किया जा सकता है, जो लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराए। इसी सोच ने आगे चलकर जियो के निर्माण की दिशा तैयार की। साल 2016 में जियो की सेवाएं शुरू हुईं और इसके बाद कंपनी ने भारतीय टेलीकॉम बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई।

लंबे समय की योजना पर भरोसा करती है रिलायंस

मीडिया मीट के दौरान ईशा अंबानी ने रिलायंस की कारोबारी रणनीति के तीन प्रमुख आधारों पर भी बात की। उन्होंने लंबी अवधि की सोच, बड़े पैमाने पर विस्तार और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने को कंपनी की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

ईशा के अनुसार, रिलायंस का ध्यान केवल तुरंत मुनाफा कमाने पर नहीं रहता। कंपनी ऐसे कारोबार विकसित करने पर जोर देती है, जिनमें आने वाले कई वर्षों तक विकास की संभावनाएं हों। इसके साथ ही बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने से लागत और परिचालन क्षमता में सुधार लाने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि किसी योजना को तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करना भी जरूरी है। कंपनी की तकनीकी क्षमताएं, संचालन व्यवस्था और दीर्घकालिक निवेश की रणनीति कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

तय समय से पहले कर्ज मुक्त बनने का लक्ष्य हासिल किया

ईशा अंबानी ने रिलायंस के वित्तीय सफर का उल्लेख करते हुए बताया कि साल 2019 में मुकेश अंबानी ने कंपनी को 2021 तक नेट डेट-फ्री बनाने का लक्ष्य रखा था। इसका मतलब था कि कंपनी का शुद्ध कर्ज खत्म करने की दिशा में तय समयसीमा के भीतर काम पूरा किया जाए।

ईशा के मुताबिक, कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रिलायंस ने यह लक्ष्य निर्धारित समय से नौ महीने पहले हासिल कर लिया। उन्होंने इसे कंपनी की वित्तीय योजना और शेयरधारकों से किए गए वादों को पूरा करने की प्रतिबद्धता से जोड़ा।

उन्होंने मजबूत बैलेंस शीट बनाए रखने और कारोबार से लगातार नकदी पैदा करने की क्षमता पर भी जोर दिया। कंपनी की रणनीति में वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ भविष्य के विस्तार के लिए संसाधन जुटाना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाने की बात

ईशा अंबानी ने अपने दादा और रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 1977 में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया था। इसके बाद रिलायंस ने विभिन्न क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ाया और भारतीय उद्योग जगत में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।

ईशा ने मीडिया मीट में कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए 29 प्रतिशत सालाना औसत रिटर्न का आंकड़ा भी साझा किया। हालांकि, निवेश से जुड़े किसी भी रिटर्न को समझने के लिए उसकी गणना की अवधि और आधार को ध्यान में रखना जरूरी होता है। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

उन्होंने कहा कि रिलायंस की सोच केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अधिक से अधिक भारतीयों को देश की आर्थिक प्रगति में भागीदारी का अवसर देना भी है।

जियो के आईपीओ पर बाजार की नजर

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के जरिए कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों को खरीदने का अवसर देती है। इससे कंपनी को पूंजी जुटाने और निवेशकों को कारोबार में हिस्सेदारी लेने का मौका मिल सकता है।

ईशा अंबानी ने जियो के सफर को भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी की जरूरत से जोड़ते हुए कंपनी के शुरुआती विचार और रिलायंस की कारोबारी सोच पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार, लंबे समय की योजना, बड़े स्तर पर विस्तार और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना कंपनी की रणनीति के प्रमुख हिस्से रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने भाई आकाश और अनंत अंबानी के साथ धीरूभाई अंबानी के विचारों और रिलायंस के ‘ग्रोथ इज लाइफ’ सिद्धांत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

निष्कर्ष: जियो की कहानी एक इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ी समस्या के अनुभव से शुरू होकर बड़े डिजिटल कारोबार के निर्माण तक पहुंची। ईशा अंबानी की मीडिया मीट में कंपनी की शुरुआत, रिलायंस की वित्तीय रणनीति और धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाने की सोच प्रमुख विषय रहे। अब जियो के आईपीओ से जुड़े अगले कदमों पर बाजार की नजर बनी हुई है।

Kinni Times
Author: Kinni Times