त्यौहारों का मौसम शुरू होते ही आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। एक तरफ जहाँ पर्व-त्यौहारों के कारण घरेलू खर्चों में भारी बढ़ोतरी होती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतों ने आम आदमी के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में चावल, चीनी, दालों, वनस्पति तेल और कपास जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार दिवाली और आगामी त्यौहारों पर खाद्य वस्तुओं की आसमान छूती कीमतें आम परिवारों की जेब पर भारी पड़ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय तनाव, खराब मौसम और महंगी शिपिंग से बिगड़ी सप्लाई
खाद्य पदार्थों की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। दुनिया भर में खराब मौसम के कारण फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जबकि मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर के आसपास सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाजों का किराया और सामान भेजने की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसके अलावा, समुद्र के रास्ते कंटेनर से सामान भेजने का खर्च कई गुना बढ़ गया है, जिससे आयात और निर्यात दोनों महंगे हो गए हैं।
चावल ने तोड़ा दो साल का रिकॉर्ड, चीनी और बायो-फ्यूल से तेल भी हुआ महंगा
चावल की वैश्विक कीमतों ने पिछले दो वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, चालू वर्ष में वैश्विक चावल उत्पादन में 2.4% तक की गिरावट आ सकती है, वहीं भारत में भी उत्पादन घटकर 14.4 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव 30% से 70% तक बढ़ चुके हैं। दूसरी ओर, ब्राजील, भारत और यूरोपीय संघ में खराब मौसम के कारण चीनी का उत्पादन घट गया है, जिससे अक्टूबर में कच्ची चीनी के भाव 8% तक बढ़ गए। इसके साथ ही, कच्चे तेल की जगह बायो-फ्यूल की बढ़ती मांग के कारण कुल वनस्पति तेल का बड़ा हिस्सा ईंधन निर्माण में जा रहा है, जिससे खाने के तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
दालों और मोटे अनाज के दाम बढ़े, आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है दबाव
किचन के अन्य जरूरी सामानों में दालों की कीमतों में भी एक साल के भीतर भारी उछाल दर्ज किया गया है। सरकारी आयात नीतियों और टैक्स ढांचे के प्रभाव के साथ-साथ बाजार में आवक कम होने से चना 23%, उड़द 24% और मटर के दामों में 47% तक की तेजी आई है। इसके अलावा जौ की कीमतों में 44%, मक्के में 9% और चाय की कीमतों में 10% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। कृषि उत्पादों की घटती पैदावार और अंतरराष्ट्रीय ढुलाई में आ रही बाधाओं को देखते हुए आने वाले समय में महंगाई का यह दबाव और गहरा सकता है।








