फ्रांस में छात्रों का बढ़ता विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे हजारों छात्र; जानिए क्या हैं मांगें और क्यों बढ़ी सरकार की चिंता

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पेरिस: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है। सितंबर के अंत से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। बड़ी संख्या में हाई स्कूल के छात्र स्कूलों के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और बेहतर शिक्षण व्यवस्था, पर्याप्त शिक्षकों और स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की मांग उठा रहे हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं।

प्रदर्शन को देखते हुए फ्रांस सरकार पर दबाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने इस सप्ताह देशभर के हाई स्कूलों की कक्षाएं बंद रखने का फैसला किया है। सरकार ने छात्रों की शिकायतों पर विचार करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाने की बात कही है।

आखिर क्यों नाराज हैं फ्रांस के छात्र?

छात्रों का सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षकों की कमी है। उनका कहना है कि किसी शिक्षक के अनुपस्थित रहने पर कई बार उनकी जगह दूसरा शिक्षक उपलब्ध नहीं होता, जिसके कारण कक्षाएं रद्द हो जाती हैं और पढ़ाई प्रभावित होती है।

इसके अलावा छात्रों और शिक्षकों ने स्कूलों में बढ़ती भीड़ को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा संख्या वाले क्लासरूम में छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान देना मुश्किल हो जाता है और पढ़ाई का स्तर प्रभावित होता है।

कई स्कूलों की इमारतों की खराब स्थिति भी आंदोलन का अहम मुद्दा बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल भवनों में पानी टपकने, साफ-सफाई की समस्या और चूहों जैसी परेशानियों का जिक्र किया है। छात्रों का कहना है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

स्कूल टाइम और लंच ब्रेक में बदलाव की मांग

छात्र स्कूल के लंबे समय को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि स्कूल के दैनिक शेड्यूल की समीक्षा की जाए और छात्रों को बेहतर आराम का समय मिले।

प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने मंत्रियों को ऐसे शेड्यूल की समीक्षा करने को कहा है, जिनमें स्कूल का समय सुबह करीब 8 बजे से शाम 6 बजे तक रहता है। साथ ही लंच ब्रेक को लंबा करने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।

फंडिंग और शिक्षा में असमानता भी बड़ा मुद्दा

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से पर्याप्त निवेश नहीं किया गया है। इसका असर स्कूलों के स्टाफ, भवनों के रखरखाव और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है।

छात्रों ने अलग-अलग इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता में अंतर को भी मुद्दा बनाया है। खासतौर पर पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों का कहना है कि उनके इलाके के स्कूलों में संसाधनों की कमी के कारण उन्हें अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम सुविधाएं मिलती हैं।

इसके अलावा पढ़ाई का दबाव, छात्रों के लिए पर्याप्त सपोर्ट स्टाफ और यूनिवर्सिटी में दाखिले की प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियां भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

कितने लोग प्रदर्शन में शामिल हुए?

प्रदर्शन के दौरान देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर नजर आए। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 2.5 लाख रही, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग 5 लाख बताई है।

हाई स्कूल स्टूडेंट्स यूनियन के अनुसार करीब 2,000 हाई स्कूलों को प्रदर्शन के चलते बंद या ब्लॉक किया गया। स्ट्रासबर्ग, ल्योन और रेनेस समेत कुछ शहरों में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि कुछ स्थानों पर आगजनी और पथराव की घटनाएं हुईं।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

बढ़ते विरोध के बीच शिक्षा मंत्री ने छात्रों से सीधे उनकी समस्याएं और सुझाव जानने के लिए कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। सरकार ने शिक्षकों की कमी दूर करने और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह व्यवस्था करने के तरीकों पर भी काम करने की बात कही है।

प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने मंत्रियों को अक्टूबर के अंत तक छात्रों की प्रमुख मांगों पर काम करने के निर्देश दिए हैं। इनमें शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूल टाइमिंग, लंच ब्रेक और जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत जैसे मुद्दे शामिल हैं।

लेकोर्नू ने प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने पर चिंता जताते हुए कहा कि स्कूल की इमारतों को नुकसान पहुंचाने से शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं होगी।

गिरफ्तारियों और हिंसा ने बढ़ाई चिंता

फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक प्रदर्शन शुरू होने के बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में 18 साल से कम उम्र के लोग शामिल हैं। न्याय मंत्रालय की ओर से भी कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।

सरकार के अनुसार प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किशोरों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

उत्तरी शहर लेंस में पुलिस और हाई स्कूल छात्रों के बीच झड़प के दौरान एक 15 वर्षीय किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस के एक ग्रेनेड को उठाने के बाद हुए हादसे में उसके हाथ और बांह का हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ।

ट्रंप ने भी फ्रांस के हालात पर दी प्रतिक्रिया

फ्रांस में चल रहे प्रदर्शन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने इस आंदोलन को लेकर इमिग्रेशन और इस्लाम से जुड़ा दावा किया, हालांकि उनके इस दावे के समर्थन में कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया।

फिलहाल फ्रांस सरकार के सामने चुनौती यह है कि छात्रों की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया जाए और साथ ही विरोध प्रदर्शनों के दौरान हो रही हिंसा को भी नियंत्रित किया जा सके।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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