उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव: 16 अक्टूबर को होना है मतदान, ओमप्रकाश राजभर के बयान से यूपी की सियासत में हलचल

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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इस चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में हलचल काफी तेज हो गई है। एनडीए (NDA) की सहयोगी पार्टी सुभासपा (SBSP) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। राजभर ने कहा है कि उनकी पार्टी के दो विधायक—अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय—राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। उनके मुताबिक, भले ही ये दोनों विधायक 2022 का विधानसभा चुनाव सुभासपा के चुनाव चिन्ह पर जीते हों, लेकिन उनका पुराना और वैचारिक राजनीतिक जुड़ाव समाजवादी पार्टी के साथ रहा है।

अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय का राजनीतिक समीकरण

गौरतलब है कि अब्बास अंसारी ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में मऊ सदर सीट से सुभासपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी, जबकि जगदीश नारायण राय जफराबाद सीट से विधायक हैं। ये दोनों ही विधायक उस समय समाजवादी पार्टी और सुभासपा के बीच हुए गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरे थे। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान इनके संभावित रुख और क्रॉस-वोटिंग की चर्चाओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है, क्योंकि सुभासपा वर्तमान में एनडीए गठबंधन का हिस्सा है।

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और तीसरा उम्मीदवार उतारने की चर्चा

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों—वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी—के नाम पर मुहर लगाते हुए 30 सितंबर को उनके नामांकन दाखिल करा दिए हैं। इसके साथ ही, राजनीतिक हलकों में इस बात की भी लगातार चर्चा है कि क्या सपा अपना तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारेगी। यदि सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो चुनाव का पूरा गणित बदल सकता है। वर्तमान विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार, सपा और कांग्रेस के पास अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए उन्हें अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी, जिसके लिए विपक्ष एनडीए खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकता है।

क्या है यूपी राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए पहली वरीयता के कम से कम 37 वोटों की जरूरत होती है। यूपी विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 403 है, हालांकि कुछ सीटें खाली होने के कारण प्रभावी संख्या इससे कम है। इस समीकरण के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगियों के पास कई सीटों पर बहुमत और मजबूत स्थिति है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटों पर अपनी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित करने में जुटी है। अब सभी की निगाहें बीजेपी की आधिकारिक उम्मीदवारों की सूची और 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि मुकाबला कितना दिलचस्प होता है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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