World Tourism Day 2026: दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों में आज फ्री एंट्री, विरासत संरक्षण पर रहेगा जोर

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नई दिल्ली: विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रविवार, 27 सितंबर 2026 को दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में पर्यटकों को निःशुल्क प्रवेश दिया जा रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ राजधानी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत से लोगों को जोड़ने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।

इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस की वैश्विक थीम “Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism” है। भारत में भी पर्यटन को अधिक डिजिटल, समावेशी और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

लाल किला, कुतुब मीनार और हुमायूं का मकबरा आकर्षण के केंद्र

दिल्ली देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल है। राजधानी के तीन प्रमुख UNESCO World Heritage Sites—लाल किला, कुतुब मीनार और हुमायूं का मकबरा—दिल्ली के इतिहास और स्थापत्य विरासत की महत्वपूर्ण पहचान हैं।

विश्व पर्यटन दिवस पर इन ऐतिहासिक स्थलों को देखने आने वाले पर्यटकों को स्मारकों के इतिहास, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने के साथ जिम्मेदार पर्यटन का संदेश भी दिया जा रहा है।

स्वच्छता और विरासत संरक्षण पर जोर

पर्यटन दिवस के कार्यक्रमों में केवल घूमने-फिरने को बढ़ावा देने के बजाय स्वच्छता और विरासत संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटकों से अपील की जा रही है कि वे स्मारक परिसरों में कूड़ा न फैलाएं और ऐतिहासिक इमारतों की दीवारों या अन्य संरचनाओं को नुकसान न पहुंचाएं।

केंद्र सरकार के 2026 के स्वच्छता अभियान संबंधी दिशा-निर्देशों में भी 27 सितंबर को पर्यटन स्थलों और ASI स्मारकों पर स्वच्छता गतिविधियों तथा ऐतिहासिक स्थलों पर नागरिक व्यवहार को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का प्रावधान किया गया है।

दिल्ली की विरासत सिर्फ बड़े स्मारकों तक सीमित नहीं

दिल्ली आने वाले विदेशी और घरेलू पर्यटक आम तौर पर लाल किला, कुतुब मीनार और हुमायूं का मकबरा जैसे प्रमुख स्थलों तक ही सीमित रह जाते हैं। लेकिन राजधानी की असली सांस्कृतिक विविधता उसके पुराने बाजारों, गलियों, कारीगरों और पारंपरिक कारोबार में भी दिखाई देती है।

दरिबा कलां की चांदी और इत्र की दुकानें, किनारी बाजार की जरी-गोटा कारीगरी, खारी बावली का सदियों पुराना मसाला कारोबार और दरियागंज का पुरानी किताबों का बाजार दिल्ली की जीवंत विरासत का हिस्सा हैं।

इन बाजारों में आज भी पारंपरिक कारोबार और कारीगरी की झलक देखने को मिलती है। हालांकि, इन स्थानों से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियों और सांस्कृतिक महत्व की व्यवस्थित जानकारी पर्यटकों तक पहुंचाना अभी भी एक चुनौती है।

Heritage Walk से स्थानीय संस्कृति को समझने का मौका

हेरिटेज वॉक से जुड़े लोगों का मानना है कि पर्यटकों में दिल्ली की स्थानीय संस्कृति और इतिहास को करीब से जानने की रुचि बढ़ रही है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें बाजारों, गलियों, इमारतों और पारंपरिक कारीगरी के पीछे छिपी कहानियों की सही जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।

ऐसी हेरिटेज वॉक पर्यटकों को केवल स्मारक देखने के बजाय स्थानीय समुदाय, कला, खान-पान, व्यापार और परंपराओं से जोड़ने में मदद कर सकती हैं।

दिल्ली में पर्यटन दिवस पर ‘रंग रस रूह’ उत्सव

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की ओर से बानसेरा, सराय काले खां में 26 और 27 सितंबर को दो दिवसीय ‘रंग रस रूह’ उत्सव भी आयोजित किया जा रहा है।

इस आयोजन में पारंपरिक कला और शिल्प, क्षेत्रीय व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कई गतिविधियां रखी गई हैं। कार्यक्रम में पपेट शो, लोकगीत, लोकनृत्य, मैजिक शो, खेल और बच्चों के लिए मनोरंजक गतिविधियां शामिल हैं।

‘Hunar Gali’ में मिट्टी के बर्तन बनाने, ब्लॉक प्रिंटिंग और मंडला आर्ट जैसी गतिविधियों में लोगों को भाग लेने का अवसर भी दिया जा रहा है।

जिम्मेदार पर्यटन का संदेश

विश्व पर्यटन दिवस का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को समझाना भी है। पर्यटन स्थानीय समुदायों, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़ा हुआ है।

दिल्ली जैसे ऐतिहासिक शहर में जिम्मेदार पर्यटन का मतलब है कि पर्यटक स्मारकों और स्थानीय बाजारों का आनंद लेने के साथ उनकी स्वच्छता और संरक्षण में भी योगदान दें।

राजधानी की ऐतिहासिक इमारतें और पारंपरिक बाजार केवल घूमने या खरीदारी करने की जगह नहीं हैं, बल्कि वे दिल्ली के अतीत और वर्तमान के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इनके संरक्षण और स्थानीय संस्कृति की सही जानकारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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