नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में SIR प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच कराने और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई.
याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र SIT/न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग की है।
13 करोड़ नाम हटाने के दावे की जांच की मांग
याचिका में दावा किया गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि ये नाम किन परिस्थितियों में हटाए गए और प्रक्रिया के दौरान संबंधित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
याचिका में प्रस्तावित जांच के तहत चुनावी डेटाबेस ECINet और ERONet का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा संबंधित सर्वर लॉग, डेटाबेस, संचार रिकॉर्ड और मेटाडेटा को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी हवाला
याचिका में हाल ही में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध मतदाता जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे। हालांकि, इन रिपोर्टों में सामने आए आरोपों और आपत्तियों को संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फॉर्म-6 में बदलाव का मामला
याचिका में नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलावों का भी उल्लेख है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म में SIR से संबंधित एक नया सवाल शामिल किया गया था, जिस पर चुनाव आयुक्तों संधू और जोशी ने आपत्ति जताई थी।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि ऐसे फैसले आयोग के सभी सदस्यों की आवश्यक सहमति के बिना लिए गए थे, तो उनकी संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच की जाए। याचिका में ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को रद्द करने की मांग भी की गई है।
CEC के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग
याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार समेत कुछ अधिकारियों के खिलाफ Representation of the People Act, 1950 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई और अभियोजन शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। हालांकि, ये सभी मांगें याचिकाकर्ता द्वारा की गई हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है।
मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका का मामला Shailendra Mani Tripathi v. Union of India के नाम से दर्ज बताया गया है।
SIR को लेकर पहले से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से अलग-अलग पहलुओं पर सुनवाई चल रही है। हाल ही में दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान जारी कुछ नोटिसों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे और मतदाताओं को जवाब देने के लिए डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल का सुझाव दिया था।
वहीं पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने पुनः शामिल किए जाने के लिए अपील की है। आयोग ने इन हटाए गए नामों के पीछे अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं जैसे कारणों का भी उल्लेख किया था।
आगे क्या?
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल ताजा याचिका में SIR से जुड़े फैसलों, मतदाता डेटा में बदलाव और कथित तौर पर हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत की ओर से दिए जाने वाले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति न्यायिक जांच और अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।








