दिल्ली में गणेश विसर्जन के लिए 81 कृत्रिम कुंड, धार्मिक सामग्री के लिए 250 से अधिक विसर्जन पात्र

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नई दिल्ली: गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने राजधानी में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए 81 कृत्रिम विसर्जन कुंड तैयार किए हैं। सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और सम्मानजनक विसर्जन व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ-साथ यमुना समेत प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की जरूरत है। उन्होंने श्रद्धालुओं और पूजा समितियों से अपील की कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित कृत्रिम कुंडों में ही करें।

13 राजस्व जिलों में तैयार किए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड

दिल्ली सरकार के अनुसार, राजधानी के सभी 13 राजस्व जिलों में कृत्रिम विसर्जन स्थलों की व्यवस्था की गई है। इन स्थानों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोशनी, सुरक्षा, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।

सरकार की योजना का उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन को कम करना और त्योहार के दौरान पर्यावरणीय दबाव को घटाना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कृत्रिम कुंडों का इस्तेमाल आगे अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों में भी किया जा सकता है।

खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री के लिए विशेष व्यवस्था

गणेश विसर्जन के साथ-साथ दिल्ली सरकार ने पुरानी या खंडित मूर्तियों और धार्मिक सामग्री के सम्मानजनक निस्तारण के लिए भी विशेष व्यवस्था की है।

सरकार की ओर से समर्पित ‘विसर्जन पात्र’ और संग्रह केंद्र तैयार किए जा रहे हैं, जहां श्रद्धालु खंडित मूर्तियां, पूजा सामग्री, देवी-देवताओं के वस्त्र, तस्वीरें और अन्य धार्मिक वस्तुएं श्रद्धा के साथ जमा कर सकेंगे। इनका व्यवस्थित तरीके से निस्तारण, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

इन संग्रह केंद्रों को मंदिरों और लोगों की पहुंच वाले अन्य उपयुक्त स्थानों के आसपास स्थापित करने की योजना है, ताकि लोगों को धार्मिक सामग्री इधर-उधर रखने की जरूरत न पड़े।

यमुना और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने पर जोर

दिल्ली सरकार ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन यमुना या अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में करने के बजाय निर्धारित कृत्रिम विसर्जन स्थलों का इस्तेमाल करें। सरकार का कहना है कि इससे धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए जल स्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

कुल मिलाकर, दिल्ली में गणेश उत्सव के दौरान आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने के लिए कृत्रिम विसर्जन कुंड और धार्मिक सामग्री संग्रह केंद्रों की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं से इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अपील की गई है, ताकि त्योहार की परंपराएं भी निभें और दिल्ली के प्राकृतिक जल स्रोतों पर अनावश्यक दबाव भी न पड़े।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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