नई दिल्ली: ट्रैफिक चालान के निपटारे से जुड़े नए नियमों के विरोध में दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने सोमवार को कामकाज का बहिष्कार किया। दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के आह्वान पर वकीलों ने अदालतों में न तो प्रत्यक्ष सुनवाई में पैरवी की और न ही ऑनलाइन माध्यम से मामलों में पेश हुए।
विरोध के तहत वकीलों ने अपने-अपने जिला अदालत परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किया। कड़कड़डूमा कोर्ट में भी बड़ी संख्या में वकील एकत्र हुए और नए ट्रैफिक चालान नियमों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। वहीं, नई दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्यों ने इंडिया गेट सर्कल पर एकत्र होकर मार्च निकालकर अपना विरोध जताया।
नियम 167 में बदलाव को लेकर नाराजगी
वकीलों का मुख्य विरोध केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के संशोधित नियम 167 को लेकर है। बार एसोसिएशनों के मुताबिक, नए प्रावधानों के तहत विवादित चालान के निपटारे की प्रक्रिया में न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका कम होकर एसडीएम, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अधिकार दिए जाने का रास्ता खुला है।
बार निकायों का कहना है कि चालान से जुड़े विवादों का फैसला न्यायिक मंच के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर किए जाने से न्यायिक प्रक्रिया और नागरिकों के कानूनी उपाय के अधिकार को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
50 फीसदी चालान राशि जमा करने की शर्त पर भी आपत्ति
वकीलों ने नए नियम में उस प्रावधान पर भी सवाल उठाया है, जिसके तहत किसी व्यक्ति की चालान संबंधी आपत्ति खारिज होने के बाद अदालत का रुख करने से पहले चालान की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। बार एसोसिएशनों का कहना है कि यह शर्त नागरिकों के लिए आगे कानूनी उपाय अपनाने में आर्थिक बाधा बन सकती है।
नए प्रावधान के अनुसार, चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर संबंधित व्यक्ति उसे स्वीकार कर भुगतान कर सकता है या निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य के साथ उसे चुनौती दे सकता है।
सरकार से नियमों पर पुनर्विचार की मांग
दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने सरकार से संशोधित नियमों और चालान निपटारे की नई व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। समिति का कहना है कि विवादित चालान के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका और नागरिकों के न्यायिक उपाय के अधिकार को बनाए रखना जरूरी है।
समिति ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उनकी आपत्तियों पर सरकार की ओर से उचित कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
सोमवार के प्रदर्शन के साथ दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों का एक दिवसीय कार्य बहिष्कार नए ट्रैफिक चालान निपटारा तंत्र को लेकर बार और प्रशासन के बीच जारी असहमति को सामने लाता है।








