नई दिल्ली: लोकल सब्जी मार्केट, किराने की दुकानों और ठेलों पर प्याज अभी भी 70 रुपये प्रति किलो के लगभग बिक रही है। भले ही कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से लगातार कोशिशें जारी हों, लेकिन आम आदमी को राहत मिलती नहीं दिख रही है। बफर स्टॉक से बाजार में भारी सप्लाई बढ़ाई गई है और ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी विशेष ट्रेनों के जरिए शहरों तक प्याज पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है, फिर भी दाम नीचे आने का नाम नहीं ले रहे हैं।
खुदरा और थोक कीमतों में भारी उछाल कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, 18-19 सितंबर को प्याज की ऑल-इंडिया औसत रिटेल कीमत 53.86 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जो कि एक साल पहले इसी अवधि में 27.6 रुपये थी यानी इसमें 95% का बड़ा उछाल आया है। देश के कई बाजारों में कीमतें अब भी 70 रुपये के आसपास बनी हुई हैं। वहीं, 18 सितंबर को औसत होलसेल कीमत 45.76 रुपये प्रति किलो रही, जो पिछले साल के 21.51 रुपये के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा है। थोक और खुदरा बाजार के बीच अभी भी बड़ा अंतर देखा जा रहा है।
सरकार की तरफ से क्या हो रहे हैं प्रयास? बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) और Nafed (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) जैसी कोऑपरेटिव संस्थाओं, केंद्रीय भंडार आउटलेट्स और मोबाइल वैन के जरिए अपने प्राइस-स्टेबिलाइजेशन बफर से मात्र 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी वाली कीमत पर प्याज उपलब्ध करा रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस साल सरकार के 1,20,000 टन के बफर स्टॉक से अब तक लगभग 9,200 टन प्याज भेजा जा चुका है।
कीमतें कम क्यों नहीं हो रहीं? (विशेषज्ञों की राय) क्रिसिल में रिसर्च डायरेक्टर पूषण शर्मा के अनुसार, हाल ही में रिटेल मार्केट में प्याज की कीमतों में आई यह तेजी मुख्य रूप से सप्लाई के संकट की वजह से है।
रबी फसल पर असर: सालाना प्याज उत्पादन में रबी फसल की हिस्सेदारी करीब 60 से 70% होती है, जिसकी सप्लाई आमतौर पर सितंबर के आखिर तक चलती है। लेकिन इस साल मानसून में देरी और बेमौसम अत्यधिक बारिश के कारण खेतों और गोदामों में रखी रबी प्याज की क्वालिटी खराब हो गई है, जो अब बाजार में बेचने लायक नहीं बची है।
नई फसल में देरी: खरीफ की नई आवक अब अक्टूबर के अंत या नवंबर में ही शुरू हो पाएगी। तब तक बाजार पूरी तरह से पुराने और सीमित बफर स्टॉक पर ही निर्भर है।
कब मिलेगी राहत? जानकार मान रहे हैं कि देर से आए मॉनसून की वजह से खरीफ की नई फसल आने में देरी हुई है, जिसके चलते सितंबर और अक्टूबर के दौरान भी बाजार में प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर से बाजार में नई फसल की आवक शुरू होने के बाद आम जनता को राहत मिल सकेगी।








