नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाली इस बैठक में दोनों नेताओं ने आपसी हितों, सीमा पर शांति और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ‘तीन सिद्धांत’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने और आगे ले जाने के लिए आपसी विश्वास बेहद जरूरी है। इसके तहत भारत की ओर से तीन मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया गया:
आपसी सम्मान
आपसी संवेदनशीलता
आपसी हित
LAC पर शांति और सीमा विवाद का समाधान
बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना रहा।
समझौतों का पालन: दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमा से जुड़े पूर्व के समझौतों और बनी सहमतियों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
निष्पक्ष समाधान: भारत और चीन ने सीमा विवाद का ऐसा स्थायी और न्यायसंगत समाधान खोजने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।
तनाव से राहत की दिशा: वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में उत्पन्न सैन्य तनाव के बाद से चल रही कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के बीच, नई दिल्ली की इस मुलाकात को रिश्तों में क्रमिक सुधार लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है (इससे पहले दोनों नेता अगस्त 2025 में तियानजिन में मिले थे)।
व्यापार, सप्लाई चेन और अन्य कूटनीतिक मुद्दे
केवल सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चों पर भी दोनों पक्षों ने खुलकर बात की:
व्यापार असंतुलन: दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे और सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के साथ-साथ एक-दूसरे के बाजारों तक आसान पहुंच बनाने पर जोर दिया गया।
ताइवान और तिब्बत: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, बातचीत के दौरान ताइवान और तिब्बत से जुड़े विषय भी उठे, जिन पर दोनों देशों के अपने-अपने स्थापित दृष्टिकोण हैं।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान: दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत-चीन संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए और छोटे-बड़े मतभेदों को आपसी विवादों में बदलने से रोका जाना चाहिए।








