किशाऊ परियोजना से दिल्ली को मिल सकती है अतिरिक्त पानी की राहत, 6 राज्यों के बीच समझौता

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नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती जरूरत के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राजधानी की दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है। 15 सितंबर 2026 को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच इस परियोजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित है।

दिल्ली को मिलेगा अतिरिक्त पानी

समझौते के अनुसार दिल्ली को परियोजना से अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने का प्रावधान है। दिल्ली सरकार के अनुसार राजधानी को करीब 109.9 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली की पेयजल उपलब्धता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

परियोजना का उद्देश्य सिर्फ दिल्ली की पानी की जरूरत पूरी करना नहीं है। इससे यमुना बेसिन में जल प्रबंधन, सिंचाई और बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा देने की योजना है। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना में करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता, लगभग 97,000 हेक्टेयर सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का प्रावधान है।

दिल्ली में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर

दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक राजधानी में पेयजल की मांग करीब 1,250 MGD आंकी गई है, जबकि उपलब्ध आपूर्ति लगभग 1,000 MGD है। यानी मांग और आपूर्ति के बीच करीब 250 MGD का अंतर है।

ऐसे में किशाऊ परियोजना से मिलने वाला अतिरिक्त पानी राजधानी की जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि, परियोजना के पूरा होने और पानी की वास्तविक आपूर्ति शुरू होने तक इसमें समय लगेगा।

अभी तुरंत नहीं मिलेगा पानी

किशाऊ परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच समझौता एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली को तुरंत अतिरिक्त पानी मिलना शुरू हो जाएगा।

केंद्र सरकार के अनुसार समझौते के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है और इसके जल घटक की लागत का करीब 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत लागत भागीदार राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।

422 मेगावाट बिजली भी पैदा होगी

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना सिर्फ जल आपूर्ति तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित परियोजना में करीब 422 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की क्षमता भी बताई गई है। इसके साथ ही सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है।

 

Kinni Times
Author: Kinni Times

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