उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब प्रदेश की सियासत में मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा केंद्र में आता दिख रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 3 और 4 सितंबर का दो दिवसीय मथुरा-वृंदावन दौरा न केवल धार्मिक, बल्कि सियासी नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
दो दिवसीय दौरे का पूरा खाका
मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम के अनुसार, मथुरा-वृंदावन के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं:
समीक्षा बैठक और दर्शन: पहले दिन मुख्यमंत्री वृंदावन में ‘ब्रज तीर्थ विकास परिषद’ के कामकाज की समीक्षा करेंगे और बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में पूजन: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री सीधे श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।
विकास परियोजनाओं की सौगात: इस दौरे के दौरान मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगभग ₹446 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास प्रस्तावित है।
बीजेपी बनाम सपा: आस्था और विकास पर आर-पार
मुख्यमंत्री के इस दौरे और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बढ़ते उल्लेख के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है:
बीजेपी का रुख: पार्टी नेताओं का कहना है कि सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प हमेशा से उनकी प्राथमिकता रहा है। बीजेपी ने विपक्षी नेताओं से सवाल किया है कि वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि दर्शन के लिए कब जाएंगे।
सपा का पलटवार: समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आस्था व्यक्तिगत विषय है और सपा के नेता किसी के दबाव में मंदिरों के दर्शन नहीं करेंगे। सपा का आरोप है कि बुनियादी मुद्दों और विकास से ध्यान भटकाने के लिए आस्था की राजनीति की जा रही है।
अयोध्या के बाद ब्रज क्षेत्र और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर तेज होती यह हलचल साफ संकेत दे रही है कि 2027 के चुनावी रण में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नैरेटिव एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।








