पंजाब में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम ‘शिफ्टेड’ (स्थानांतरित) दर्ज होने के बाद राज्य में सियासी घमासान छिड़ गया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
विपक्ष का हमला: बदले की राजनीति का आरोप
बिक्रम सिंह मजीठिया (शिरोमणि अकाली दल): अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए आम आदमी पार्टी जिसे चाहे वोटर बनवा सकती है और जिसे चाहे हटवा सकती है। उन्होंने कहा कि जब राघव चड्ढा सरकार के करीबी थे, तब वह खुद को पंजाब का बताते थे, लेकिन उनके पार्टी छोड़ने और बीजेपी में जाने के बाद उनका वोट काट दिया गया।
प्रदीप भंडारी (बीजेपी): बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को चुनावी हार का डर सता रहा है, इसलिए वह पंजाब की सरकारी मशीनरी पर दबाव बनाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
इमरान मसूद (कांग्रेस सांसद): सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह से मतदाताओं के नाम कटना पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
आम आदमी पार्टी का पलटवार
विपक्षी आरोपों का जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी के नेताओं ने राज्य सरकार की भूमिका से इनकार किया:
अमन अरोड़ा और हरपाल चीमा: नेताओं ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट बनाने या उसमें संशोधन करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास होता है, राज्य सरकार के पास नहीं। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 20 लाख नाम विभिन्न श्रेणियों (मृत्यु, डुप्लीकेट या पलायन) के तहत हटाए गए हैं, जिसमें कई प्रवासी शामिल हैं। इसे अलग से राजनीतिक मुद्दा बनाना गलत है।
सौरभ भारद्वाज: उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं और यह बात सभी जानते हैं। ऐसे में उनका नाम पंजाब की ड्राफ्ट सूची में स्थानीय पते पर न होना कोई बदले की कार्रवाई नहीं है।
फिलहाल यह सूची केवल ड्राफ्ट (प्रारूप) चरण में है, जिस पर चुनाव आयोग के नियमों के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है।








