भारत की 2027 की जनगणना की प्रक्रिया अब एक अहम चरण में पहुंचने जा रही है। सोमवार से लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले और दुर्गम इलाकों में ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ की शुरुआत होगी। इसके तहत लोग जनगणना के लिए अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। इस चरण में देश के ऐसे इलाकों को शामिल किया गया है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की वजह से पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और मुश्किल रास्तों वाले स्थानों में रहने वाले लोगों के लिए खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
परिस्थितियों के कारण जनगणना कर्मियों की पहुंच आसान नहीं होती
जनगणना के दौरान परिवारों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके लिए गृह मंत्रालय की ओर से हाउसहोल्ड शेड्यूल के तहत पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची जारी की गई है। जनगणना अधिकारी इन सवालों के माध्यम से घर और परिवार से संबंधित जरूरी विवरण दर्ज करेंगे।
‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ की व्यवस्था के जरिए लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। खास तौर पर उन क्षेत्रों में यह सुविधा उपयोगी होगी, जहां खराब मौसम, बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जनगणना कर्मियों की पहुंच आसान नहीं होती।
जनगणना की आगे की प्रक्रिया किस तरह बढ़ती
जनगणना देश की आबादी और परिवारों से जुड़ा महत्वपूर्ण आधिकारिक आंकड़ा तैयार करने की प्रक्रिया है। इससे मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल सरकार की ओर से विकास योजनाएं तैयार करने, संसाधनों के वितरण और विभिन्न नीतियों के निर्माण में किया जाता है। 2027 की जनगणना की प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों में सेल्फ-एन्यूमरेशन की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब सोमवार से शुरू होने वाले इस चरण के बाद जनगणना की आगे की प्रक्रिया किस तरह बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।








