भारत में पिछले 11 सालों के दौरान विदेशी निवेश को लेकर एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। केंद्र सरकार की आसान व्यापार नीतियों, पारदर्शी नियमों और निवेशकों के अनुकूल उठाए गए कदमों का असर अब देश में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के आंकड़ों में साफ़ तौर पर नज़र आ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014 से 2025 के बीच भारत ने कुल 748.78 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया है।
आकर्षित करने में सबसे अहम भूमिका निभाई
यह आंकड़ा इससे पिछले 11 वर्षों (2003 से 2014) की तुलना में करीब 143 प्रतिशत अधिक है। पिछली अवधि में देश में कुल 308.38 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। इतना ही नहीं, पिछले 25 वर्षों में भारत में आए कुल एफडीआई का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा केवल इन अंतिम 11 वर्षों में ही प्राप्त हुआ है। यह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक कंपनियों के भारत पर मजबूत होते भरोसे को दर्शाता है। विदेशी निवेशक अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। भारत के सेवा क्षेत्र (Services Sector), कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर, ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में सबसे ज्यादा विदेशी पूंजी का निवेश हो रहा है। इसके अलावा, भारत में एफडीआई लाने वाले प्रमुख देशों में सिंगापुर, मॉरीशस और अमेरिका सबसे आगे रहे हैं। वहीं राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र, कर्नाटका और दिल्ली विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं। Experts का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’ और इज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे अभियानों ने वैश्विक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित करने में सबसे अहम भूमिका निभाई है।







