पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में इस साल मानसून की बारिश लगातार तबाही का सबब बनी हुई है। मूसलाधार बारिश, जगह-जगह हो रहे भूस्खलन और सड़कों के धंसने के कारण पूरे प्रदेश में जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। नदी-नाले उफान पर हैं और पहाड़ों से मलबा गिरने की वजह से कई मुख्य मार्गों समेत 76 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क मुख्यधारा से कट गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लेकर अब तक प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण कुल 27 लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। इसके अलावा आपदा से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में 29 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
लोगों की आजीविका पर संकट मंडराने लगा
लगातार हो रही इस आफत की बारिश का असर अब रिहायशी इलाकों पर भी साफ नजर आने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जिलों में भारी बारिश और मलबे की चपेट में आने से दर्जनों मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों के पशुधन को भी भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका पर संकट मंडराने लगा है।
स्थानीय निवासियों और यात्रियों को बेवजह यात्रा से बचने की सलाह
प्रशासन की ओर से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। बंद पड़ी 76 सड़कों को खोलने के लिए जगह-जगह भारी मशीनरी तैनात की गई है, हालांकि लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण मार्ग बहाल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने भी प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में आगे भी भारी बारिश का अलर्ट जारी रखते हुए स्थानीय निवासियों और यात्रियों को बेवजह यात्रा से बचने की सलाह दी है।








