पुरी रथ यात्रा से पहले बड़ा विवाद: ISKCON की अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्रा निकालने पर छिड़ी धार्मिक बहस

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16 जुलाई को निकलेगी मुख्य यात्रा, तारीखों को लेकर उठे सवाल

ओडिशा के पुरी में हर साल निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा इस साल 16 जुलाई को शुरू होने जा रही है। दुनिया भर में सनातन धर्म की आस्था का यह एक बहुत बड़ा केंद्र है, लेकिन इस बार उत्सव की शुरुआत से पहले एक बड़ा धार्मिक विवाद सामने आ गया है। विवाद इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग तिथियों (तारीखों) पर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आयोजित करने को लेकर है। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या मुख्य पंचांग और तिथि से इतर यात्रा निकालना धार्मिक शास्त्रों और परंपराओं के अनुकूल है?

पुरी के गजपति महाराजा और धर्माचार्यों ने जताई आपत्ति

चारधामों में से एक पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा का मुख्य और मूल निवास स्थान माना जाता है। इस्कॉन पिछले कई दशकों से भारत के बाहर लंदन, न्यूयॉर्क, सिडनी और मॉस्को जैसे 100 से अधिक वैश्विक शहरों में रथ यात्रा का आयोजन करता आ रहा है।

**धार्मिक संगठनों का तर्क:**पुरी के गजपति महाराजा, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और देश के कई शीर्ष धर्माचार्यों का स्पष्ट कहना है कि रथ यात्रा का आयोजन विश्व में कहीं भी हो, लेकिन उसकी तिथि वही होनी चाहिए जो पुरी के पंचांग के अनुसार तय की जाती है। सनातन परंपरा में तिथियों का विशेष महत्व है और इनमें बदलाव करना शास्त्रों के विरुद्ध है। इस विषय को लेकर कुछ हिंदू संगठनों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की भी मांग की है।

इस्कॉन ने दी व्यावहारिक दिक्कतों की दलील

दूसरी ओर, इस्कॉन (ISKCON) ने इस पूरे विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए व्यावहारिक चुनौतियों का हवाला दिया है। संस्था का कहना है कि विदेशों में स्थानीय प्रशासन से रूट की अनुमति मिलना, वहां का मौसम, सार्वजनिक छुट्टियां (Weekends) और लॉजिस्टिक्स जैसी कई व्यवस्थाओं के कारण पुरी की सटीक तारीख पर कार्यक्रम कर पाना हमेशा संभव नहीं हो पाता।

इस्कॉन के मुताबिक, यदि रथ यात्रा के हर एक सूक्ष्म नियम और पुरी की भौगोलिक व्यवस्था का अक्षरशः पालन किया जाए, तो यह यात्रा केवल पुरी में ही संभव हो सकेगी। संस्था का उद्देश्य परंपरा का अनादर करना नहीं, बल्कि समय और स्थान के अनुसार व्यावहारिक बदलाव करके वैश्विक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक भगवान जगन्नाथ की भक्ति और संस्कृति को पहुंचाना है। फिलहाल, रथ यात्रा उत्सव से ठीक पहले इस गंभीर विषय पर साधु-संतों और विचारकों के बीच बहस तेज हो गई है।

Kinni Times
Author: Kinni Times