देश में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण) को लेकर लंबे समय से चल रही तमाम भ्रांतियों और विवादों पर अब केंद्र सरकार ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लगातार यह दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति से देश के अन्नदाताओं को फायदे की जगह भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन अब सरकार ने आधिकारिक आंकड़े जारी कर इस गलतफहमी को पूरी तरह दूर कर दिया है। पत्र सूचना कार्यालय यानी पीआईबी (PIB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी एक विस्तृत फैक्टशीट के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम की बदौलत देश के किसानों ने अब तक 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये (₹1.60+ लाख करोड़) से भी अधिक की अतिरिक्त कमाई की है।
अतिरिक्त आय के रूप में किसानों के बैंक खातों तक पहुंचा
पीआईबी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014-15 से लेकर मई 2026 तक एथेनॉल मिश्रण नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र की सूरत बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में देश के भीतर ही गन्ने, मक्का और खराब हो चुके चावल (टूटे हुए चावल) से तैयार होने वाले एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर सरकार ने न केवल कच्चे तेल पर निर्भरता कम की है, बल्कि भारी-भरकम विदेशी मुद्रा की भी बचत की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति से अब तक देश को ₹1.90 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर अतिरिक्त आय के रूप में किसानों के बैंक खातों तक पहुंचा है।
1,200 करोड़ लीटर तक पहुंचने का अनुमान
सरकार के इस महत्वाकांक्षी बायोफ्यूल कार्यक्रम ने रफ्तार के मामले में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने (E20 Fuel) का जो लक्ष्य तय किया था, उसे समय से 5 साल पहले ही सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण महज 1.5 प्रतिशत के आसपास था, वहीं अब यह बढ़कर 20 प्रतिशत के आंकड़े को छू चुका है। इसके चलते देश में एथेनॉल की खरीद 38 करोड़ लीटर से बढ़कर करीब 1,200 करोड़ लीटर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और एथेनॉल प्लांट से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए हैं।








