: ई-20 (20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने ई-20 से जुड़े कई सवालों के जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इंजन खराब होने, बीमा रद्द होने या पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे भ्रामक हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ई-20 को लेकर उठे सवालों के बाद यह बहस तेज हो गई थी। इसके बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर लोगों की शंकाओं का समाधान किया।
सरकार के अनुसार, इथेनोल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है। इसी वजह से ई-20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर वाहनों के माइलेज में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि इसे सामान्य और स्वीकार्य बताया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि एआरएआई, इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए परीक्षणों में ई-20 से इंजन या उसके प्रमुख पुर्जों को कोई गंभीर नुकसान नहीं पाया गया। केवल कुछ पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को सामान्य से पहले बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
सरकार ने यह भी साफ किया कि ई-20 के लिए उपयुक्त या कंपनी द्वारा स्वीकृत वाहनों की वारंटी और बीमा पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
ई-20 को बिना परीक्षण वाला ईंधन बताए जाने के दावों को भी सरकार ने खारिज किया। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से इथेनोल मिश्रित पेट्रोल का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। भारत में भी हजारों किलोमीटर तक विभिन्न परिस्थितियों में इसका परीक्षण किया जा चुका है।
पानी की खपत को लेकर फैलाए जा रहे दावों पर सरकार ने कहा कि एक लीटर इथेनोल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होने की बात गलत है। डिस्टिलरी में प्रति लीटर इथेनोल उत्पादन के लिए लगभग 3 से 5 लीटर प्रसंस्कृत पानी का उपयोग होता है, जिसे दोबारा रिसाइकिल भी किया जाता है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस या चीनी नहीं मिलाई जाती। ईंधन में केवल औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार फ्यूल-ग्रेड इथेनोल निर्धारित मानकों के अनुसार मिलाया जाता है। इसी कारण ई-20 पेट्रोल पर चींटियां या मधुमक्खियां आने जैसे दावे भी पूरी तरह निराधार बताए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इथेनोल मिश्रण कार्यक्रम से देश को बड़ा आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिला है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, किसानों को बेहतर भुगतान मिला है, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटी है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। सरकार ने यह भी बताया कि दिसंबर 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया गया।
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