अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ी उम्मीदें

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पिछले कई महीनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बाद अब दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं, जबकि ईरान ने कहा है कि समझौते के मसौदे पर सहमति बन चुकी है, लेकिन हस्ताक्षर की तारीख अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि समझौता होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरानी अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम समझौते तक पहुंचने में कुछ और समय लग सकता है।

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दावा किया कि दोनों पक्ष शांति समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो चुके हैं और हस्ताक्षर की तैयारियां जारी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति को मजबूत करेगा।

समझौते में क्या हो सकता है शामिल?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और शुरुआती 60 दिनों के युद्धविराम का प्रावधान शामिल हो सकता है। इसके अलावा समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने के उपायों पर भी सहमति बनने की संभावना है।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस समझौते के तहत ईरान को कोई आर्थिक सहायता नहीं देगा। उन्होंने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

ईरान ने रखी अपनी शर्तें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि समझौते के कुछ बिंदुओं पर अभी भी बदलाव संभव है। उनके अनुसार समझौते को दो चरणों में लागू किया जा सकता है, जिसमें पहले चरण में परमाणु मुद्दे को शामिल नहीं किया जाएगा। बाद के चरण में परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

अराघची ने यह भी कहा कि यदि समझौते के प्रारंभिक प्रावधानों का पालन नहीं हुआ तो अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी गतिविधियां

इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ान भर रहे कई संदिग्ध ड्रोन को मार गिराया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई।

उधर, ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी UKMTO ने ओमान के समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर रॉकेट हमले की जानकारी दी है। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

लेबनान में जारी है संघर्ष

क्षेत्रीय तनाव के बीच दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले भी जारी रहे। शनिवार को हुए विभिन्न हमलों में चार लोगों की मौत की खबर है। जवाबी कार्रवाई में हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेट दागे, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता सफल रहता है तो यह पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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Author: Kinni Times